Beti Bachao Beti padhao essay in Hindi language | बेटी बचाव बेटी पढाओं निबंध

Beti Bachao Beti padhao essay in Hindi language हम लडको को घर का चिराग मानते है और लडकियों को पढाई लिखाई से दूर रहकर उनका हक्क छीन लिया जाता है| लड़कियों को पढ़ा-लिखा कर उन्हें जागरूक करना चाहिये, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना ही इस योजना का मुख्य उद्देश्य है| जब महिलाएं स्वयं पढ़ी-लिखी और अपने पैरों पर खड़ी होंगी तो वे खुद को और अन्य किसी महिला को बोझ नहीं समझेंगी तथा अपने निर्णय लेने में समर्थ होंगी| इस योजना के द्वारा जाँच केन्द्रों, हस्पताल में भी यदि कोई जाँच कि तो उसका लाइसेंस भी रद्द कर दिया जायेगा| इस योजना के सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं और जिन राज्यों में महिला पुरुष के अनुपात में काफी अंतर था वह भी घटने लगा है|

स्त्रियों को कम आँकना, उन्हें कम दर्जा देना, घर की चारदीवारी तक सीमित रखना पुराने समय से ही चला आ रहा है| महिलाओं को उनके अधिकार ना देकर उनके साथ हर कार्य में भेदभाव करना जैसे समाज के लिए आम बात है| कितनी ही होनहार लडकियाँ बहुत कुछ करना चाहती हैं| लेकिन पुरुष प्रधान समाज उन्हें हमेशा आगे बढ़ने से रोकता आया है| समाज को लगता है की लड़कियों ज्यादा पढ़-लिख कर क्या करेंगी ? उनका तो चूल्हा-चौका संभालना, बच्चों की परवरिश करना और परिवार का ध्यान रखना ही है| उन्हें कौन सा बाहर निकल कर काम करना है, इसलिए इन्हें क्यों पढ़ाया जाय? यहाँ तक कि लड़कियों को बोझ समझ कर उन्हें गर्भ में ही मार दिया जाता है| लेकिन कुछ लोगों में इस विषय में सुधार आया है| कुछ महिलाएं भी आगे आई हैं| लेकिन, महिलाओं को अभी भी पूर्ण अधिकार प्राप्त नहीं हुए हैं, जिनकी वे हकदार हैं|

किसी भी देश के विकास के लिए मानवीय संसाधन के रूप में महिला और पुरुष दोनों ही महत्त्व रखते हैं| किन्तु पुरुष प्रधान देश में लोग ऐसा नहीं मानते| हाँलाकि यह स्थिति मात्र भारत देश की ही नहीं है, विदेशों में भी महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है| समान कार्य के लिए महिलाओं को पुरुषों के अपेक्षा कम वेतन दिया जाता है| इन सब का एक बड़ा कारण अशिक्षा भी है|

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान :

इसी समस्या के समाधान के लिए सरकार द्वारा एक अभियान चलाया जा रहा है जिसका नाम है “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ|” इस अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा 22 जनवरी 2015 को पानीपत, हरियाणा में की गई थी| यह स्थान चुनने का एक महत्वपूर्ण कारण था यहाँ लिंग अनुपात में बहुत अधिक अंतर| इस अभियान के सुचारू क्रियान्वन के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन मंत्रालय को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे किसी भी स्तर पर इस अभियान में कोई कमी ना रह पाए| कन्या शिशु-दर, जो कि लगातार घटती जा रही है, को संतुलित करना एवं उनकी शिक्षा पर जोर देना इस अभियान का उद्देश्य है|

इस योजना के तहत यदि कोई भी व्यक्ति और संस्थान भ्रूण लिंग परिक्षण अथवा भ्रूण हत्या का दोषी पाया गया तो उसके ऊपर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी| अब हर जाँच केंद्र और हस्पताल में साफ़-साफ़ लिखा होता है कि भ्रूण के लिंग की जाँच कराना कानूनी अपराध है| इसलिये अभी अपराजित से बच्चे और अपनी लडकियो को आजादीसे जीने दो | यह विश्व में उनका स्वागत करो |

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