Bharat-Chin sambandh essay in Hindi language | भारत-चीन संबंध पर हिंदी निबंध

Bharat-Chin sambandh essay in Hindi language चीन हा देश भारत के सीमा से लागू है| दोनों में प्रचीन काल से ही सांस्कृतिक तथा आर्थिक सम्बन्ध रहे हैं| भारत से बौद्ध धर्म का प्रचार चीन की भूमि पर हुआ है| चीन के लोगों ने प्राचीन काल से ही बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण करने के लिए भारत के विश्वविद्यालयों अर्थात् नालन्दा विश्वविद्यालय एवं तक्षशिला विश्वविद्यालय को चुना था क्योंकि उस समय संसार में अपने तरह के यही दो विश्वविद्यालय शिक्षा के महत्वपूर्ण केन्द्र थे| उस काल में यूरोप के लोग जंगली अवस्था में थे|

यद्यपि 1946 में चीन के साम्यवादी शासन की स्थापना हुई तदपि दोनों देशों के बीच मैत्री सम्बन्ध बराबर बने रहे| चीन के संघर्ष के प्रति भारत द्वारा विकासशील देश नीति की गई एवं पंचशील पर आस्था भी प्रकट की गई| वर्ष 1949 में नये चीन की स्थापना के बाद के अगले वर्ष, भारत ने चीन के साथ राजनयिक सम्बन्ध स्थापित किये| इस तरह भारत, चीन लोक गणराज्य को मान्यता देने वाला प्रथम गैर-समाजवादी देश बना|

वर्ष 1954 के जून माह में चीन, भारत व म्यान्मार द्वारा शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व के पाँच सिद्धान्त यानी पंचशील प्रवर्तित किये गये| पंचशील चीन व भारत द्वारा दुनिया की शान्ति व सुरक्षा में किया गया एक महत्वपूर्ण योगदान था, और आज तक दोनों देशों की जनता की जबान पर है| देशों के सम्बन्धों को लेकर स्थापित इन सिद्धान्तों की मुख्य विषयवस्तु है| परन्तु चीन नें मैत्री सम्बन्धों को ताख पर रख कर 1962 में भारत पर आक्रमण कर दिया और भारत की बहुत सारी भूमि पर कब्जा करते हुए 21 नवम्बर 1962 को एकपक्षीय युद्धविराम की घोषणा कर दी| उस समय से दोनों देशों के सम्बन्ध आज-तक सामान्य नहीं हो पाए हैं|

जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने चीन से दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया, परन्तु भारत को सफलता नहीं मिली, क्योंकि चीन ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अन्यायपूर्ण ढँग से पाकिस्तान का एकतरफा सर्मथन किया था| 23 सितम्बर 1965 को भारत-पाकिस्तान युद्धविराम का समझौता हो गया| अतः चीन के सारे इरादों पर पानी फिर गया|

पाकिस्तान ने भारत के शत्रु की हैसियत से चीन को काराकोरम क्षेत्र में बसा दिया एवं पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का 2,600 वर्ग मील भू–भाग चीन को सौंप दिया| जिससें चीन के साम्यवादी दल के सर्वाधिक शक्तिशाली नेता एवं चीन के राष्ट्रपति जियांग जोमीन ने नवम्बर 1966 में तीन दिन की भारत यात्रा की थी|

यह चीन के राष्ट्रपति द्वारा की गई पहली यात्रा थी| इस यात्रा के दौरान एक एतिहासिक समझौता किया गया, जिसके अर्न्तगत  वास्तविक नियन्त्रण रेखा पर एक दूसरे द्वारा आक्रमण नही करने का वचन दिया गया| दोनों देशों ने अपने सैनिक बल का प्रयोग न करने का एवं हिमालय की झगड़े वाली सीमा पर शान्ति व्यवस्था बनायें रखने का समझौता किया| इस यात्रा के समय 11 सूत्रीय समझौता किया गया|

अक्टूबर 1967 में भारत और चीन के मध्य तेल एवं गैस को प्राप्ति करने की भागीदारी के लिए एक समझौता किया गया था| परंतु आज के समय मे भारत और चीन का सीमा विवाद आज तक बना हुआ है| हालांकि इधर चीन व भारत के सम्बन्धों में भारी सुधार हुआ है, तो भी दोनों के सम्बन्धों में कुछ अनसुलझी समस्याएँ रही हैं| चीन व भारत के बीच सब से बड़ी समस्याएँ सीमा विवाद और तिब्बत की हैं| चीन सरकार हमेशा से तिब्बत की समस्या को बड़ा महत्व देती आई है|

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