Dhan ka upyog essay in Hindi language | धन का उपयोग हिंदी निबंध

Dhan ka upyog essay in Hindi language आज पैसा सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चूका हैं| समाज में सम्मानित जीवन वही लोग जीते हैं जो धनवान हैं| गरीब लोगों की कोई आवभगत नहीं हैं| हमारे यहाँ एक अच्छी कहावत है जब तक जेब मे पैसा हैं लोग पूछेगे तू कैसा हैं| यह सच्चाई हैं क्योंकि धन के बिना व्यक्ति न अच्छी शिक्षा पा सकेगे न अच्छे वस्त्र भोजन, ईलाज करवा पाएगा, इसलिए सम्मानित जीवन जीने में धन मददगार साबित होता हैं| धन जीवन की आवश्यकताओ की पूर्ति का अहम साधन हैं न कि साध्य, हम धन के द्वारा ही सभी आवश्यक वस्तुएं खरीद पाते हैं| धन के महत्व को कोई नहीं नकार सकता मगर इसके महत्वहीन उपयोग और अधिक से अधिक पाने की चाहत मनुष्य को बहुत नीचे गिरा देती हैं|

प्रत्येक समय संसार के अधिकतर लोगों के मस्तिष्क में एक विचार चलता है, वह है अधिक से अधिक धन कमाने के आसान से आसान तरीके और उपाय| पृथ्वी के अन्य जीवों तथा प्राणियों को छोड़कर धन मनुष्य की अहम जरूरत हैं, जिसकी मदद से वह अपनी सभी जरूरतों की पूर्ति कर पाता हैं| हमारे दैनिक जीवन की कई मूलभूत जरूरतों यथा रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा ईलाज आदि की पूर्ति के लिए धन का होना परिहार्य हैं, इस तरह हम कह सकते है, कि धन के बिना जीवन व्यतीत करना बेहद मुश्किल हो सकता है, मगर असम्भव तो कतई नहीं|

बहुत से लोग धनाभाव में अथवा बेहद अल्प धन के सहारे ही जीवन काट लेते हैं| जीवन में ख़ुशी, स्नेह प्रेम और रिश्तों को अधिक मजबूत और खुशहाल बनाने में पैसा अपनी भूमिका अदा कर सकता हैं| मगर धन ही इनका स्रोत कभी नहीं हो सकता हैं| भारतीय संस्कृति में धन जिसे अर्थ के रूप में सम्बोधित किया जाता हैं| जीवन के चार अहम कर्तव्यों में गिना जाता हैं|

व्यक्ति को धनार्जन की आयु में अपने कुटुंब के जीवन यापन उनकी इच्छाओं अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए धन कमाना उचित हैं| मगर गलत तरीको से कमाया गया धन जीवन के लिए विष के समान होता है, हम धन की मदद से बहुत कुछ अर्जित कर सकते हैं| मगर सुख, प्रेम, ख़ुशी और प्रेम को को नहीं पा सकते हैं|

धन की शक्ति और जादू ही कुछ ऐसा ही होता हैं यह अच्छे अच्छों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेता हैं, हमारे घर के संस्कार ही बच्चों को धन की लालसा तथा संग्रह की प्रवृत्ति को जन्म देते हैं| जब बच्चा स्कूल जाने में आनाकानी करता हैं तो मम्मी पापा उसे पैसे देकर स्कूल भेजने के लिए राजी करते हैं| हमारी यही सोच गहरी होती जाती हैं और एक दिन हम अपने, अपने परिवार समाज, देश के लिए कुछ करने की बजाय पैसे के लिए सब कुछ करने लगते हैं| हमारा समस्त क्रियाकलाप दौलत पर केन्द्रित हो जाता हैं जो कई मायनों में घातक हैं|

जब हम बीमार पड़ते है तो हमें ईलाज के लिए अच्छी दवाई और डॉक्टर की मदद लेनी पड़ती है| ऐसे में भले ही हमारे अपने काम न आए हमें स्वस्थ बनाने में हमारी पूंजी मदद करती हैं| आज के दौर में धन के कई रूप हैं, जिन्हें हम आमतौर पर दौलत, पूंजी या सम्पति के रूप में परिभाषित करते हैं|

Dhan ka upyog essay in Hindi language. धन का उपयोग ये निबंध आपको कैसे लगा ये हमे कमेंट करके जरूर बताये|

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