Dhobi Ki Atmakatha essay in Hindi language | धोबी की आत्मकथा हिंदी निबंध

Dhobi Ki Atmakatha essay in Hindi language मै धोबी बोल रहा हूँ| जिस तरह से भगवान लोगो के पाप धोता है, उसी प्रकार मैं लोगो के गंदे कपडे होता हूँ|
संत कबीर ने कहा है कि, बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय ||

निंदक बिना साबुन और पानी के सहारे ही मन को निर्मल करते हैं| उसी प्रकार साबुन और जल के साथ ही सही, मैं भी लोगों के गंदे कपड़ों को निर्मल करने वाला धोबी हूँ| मैं कपडे धोने में जाट-पात, उंच-नीच का भेदभाव नहीं रखता हूँ| एक हरिजन और एक ब्राह्मण के गंदे कपडे मेरे लिए सामान है| इस प्रकार मेरे व्यवसाय से समाजवाद की सुगंध निकलती है| राष्ट्रकवि दिनकर के शब्दों में तो मैं ही श्रेष्ठ ज्ञानी हूँ|

मेरी दिनचर्या अतिव्यस्त रहती है| गाँव-गाँव, घर-घर, घूम-घूमकर मैं गंदे कपड़ों को एकत्रित करता हूँ| इसे गाँव के समीप ही स्थित नदी या तालाब के किनारे धोने के लिए ले जाता हूँ| इन किनारों को ‘धोबी घाट’ कहा जाता है| जहां नदी और तालाब नहीं होते, वहां मैं यह कार्य कुंए अथवा नल के पानी से करता हूँ| साफ़ कपडे को इस्त्री कर नियत समय के अंदर लोगों तक पहुंचाता हूँ| बिलम्ब होने पर मुझे ग्राहकों का कोपभाजन भी बनना पड़ता है|

इससे प्राप्त पारिश्रमिक से ही मैं अपने परिवार का भरण-पोषण करता हूँ| इस कठिन कार्य में सिर्फ गधा मेरा साथी है| जेठ की दोपहरी हो या माघ की सर्दी, गधा गंदे कपड़ों को घर से घात एवं साफ़ कपड़ों को घाट से घर धोने का कार्य करता है| इस कार्य के लिए मैं गधे को कुछ भी नहीं देता हूँ| ग्रामीण इलाकों में मेरा काम शहरों की अपेक्षा अधिक कठिन होता है| यहाँ धोने के लिए शहरों की भाँती अच्छी किस्म के साबुन, पाउडर और मशीन उपलब्ध नहीं रहते हैं|

गांव में गंदे कपड़ों को सोडा और जल के साथ भट्टी में खौलाकर घाट पर पटक-पटक कर साफ़ करता हूँ| इससे कपड़ों के शीर्घ फटने की संभावना रहती है| ऐसा मैं शौक से नहीं अपितु आर्हतिक मजबूरी में करता हूँ| सरकारी स्तर पर धन की सुविधा करवाकर मेरी जर्जर माली हालत एवं कपडे होने की घटिया विधि में सुधार लाया जा सकता है| जिस प्रकार मैं समाज की गन्दगी से घृणा नहीं रखता हूँ, उसी प्रकार समाज को भी मुझसे घृणा नहीं करनी चाहिए| मैं भी समाज का एक महत्त्वपूर्ण अंग हूँ| धोबी भारत में पाये जाने वाले जाति समूह हैं जिनका मुख्य कार्य कपड़े धोने, रंगने और इस्त्री करने से संबंधित माना जाता है|

भारत के अलग-अलग राज्यों में इन्हें अलग-अलग नामों जैसे-मादीवाला, अगसार, पारित, श्रीवास, दिवाकर, रजक, चकली, राजाकुला, वेलुत्दार, एकली, सेठी, मरेठिए या, पणिक्कर आदि अन्य कई नामों से जाना जाता है| हिन्दू धोबी को धोबी नाम से जाना जाता है| धोबी शब्द की व्युत्पत्ति धावन या धोने से मानी जाती है| हिन्दू धोबी अछूत  माने जाते थे और अनुसूचित जाति में उन्हें सम्मिलित किया गया है| इस प्रकार मैने मेरे जीवन के बारे मे आपको बता ये है |

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