नशीले पदार्थ के दुष्परिणाम हिंदी निबंध Drug Abuse Essay in Hindi

नशीले पदार्थ के दुष्परिणाम हिंदी निबंध Drug Abuse Essay in Hindi: मानव-समाज में नशीले मादक द्रव्यों का सेवन कोई नई बात नहीं है। सुरापान तो प्राचीन काल से चला आ रहा है। गांजा, चरस, भाँग, अफीम, धूम्रपान आदि के व्यसनियों की हमेशा एक अच्छी तादाद रही है। आजकल हेरोइन, हशीश, कोकिन आदि नशीली वस्तुओं का बोलबाला है। पहले केवल अमीर वर्ग ही नशे का आदी था, परंतु आजलक तो नशे की लत आम होती जा रही है। कॉलेज और स्कूलों के विद्यार्थी भी नशे के शिकार हो रहे हैं । नशे की इस नई लहर ने दुनियाभर की सरकारों को गहरी चिंता में डाल दिया है।

नशीले पदार्थ के दुष्परिणाम हिंदी निबंध Drug Abuse Essay in Hindi

नशीले पदार्थ के दुष्परिणाम हिंदी निबंध Drug Abuse Essay in Hindi

मादक द्रव्यों के सेवन से व्यक्तिगत हानि

मादक द्रव्य जीवन के दुश्मन हैं। ये देवता को भी राक्षस बना देते हैं, फिर मनुष्य की तो बात ही क्या? कुछ समय के लिए मस्ती देनेवाले नशीले द्रव्यों के निरंतर सेवन से मनुष्य के तन-मन निष्क्रिय और शिथिल हो जाते हैं, दृष्टि कमजोर हो जाती है, पाचनशक्ति मंद पड़ जाती है तथा हृदय और फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है। इससे स्वास्थ्य चौपट हो जाता है और मनुष्य असमय ही मृत्यु का द्वार खटखटाने लगता है। ऐसा व्यक्ति किसी की सहानुभूति का पात्र नहीं रहता। अन्य लोग उससे घृणा करने लगते हैं। उसकी प्रतिष्ठा धूल में मिल जाती है।

परिवार पर बुरा असर

नशेबाज केवल अपने ही पाँव पर कुल्हाड़ी नहीं मारता, किंतु उसके कारण सारे परिवार की सुख-शांति छिन जाती है। नशे पर धन की बरबादी से परिवार पर अभावों की काली छाया मँडराने लगती है । गृह-कलह से परिवार में तनाव और उलझनें बढ़ती हैं। कितने ही परिवार शराब की बोतल में डूबकर नष्ट हो जाते है। शराबी पतियों के अत्याचार से तंग आकर कितनी ही पत्नियाँ आत्महत्या कर लेती हैं। मादक द्रव्यों का व्यसनी पिता अपने बच्चों के भविष्य को भी अंधकार में डुबो देता है।

समाज और राष्ट्र पर दुष्प्रभाव

मादक द्रव्यों के प्रचलन से समाज और राष्ट्र को भारी हानि उठानी पड़ती है। समाज में अपराध बढ़ते हैं। कानून और व्यवस्था की स्थिति खतरे में पड़ जाती है। लोग आलसी, कायर और विलासी बन जाते हैं। उनका नैतिक बल नष्ट हो जाता है। उनकी कार्य कुशलता बुरी तरह प्रभावित होती है। मादक द्रव्यों के अवैध व्यापार से राष्ट्र की अर्थ-व्यवस्था को भारी चोट पहुँचती है।

हानियाँ ही हानियाँ

मादक द्रव्यों के सेवन में हानियाँ ही हानियाँ हैं। इनसे व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों का पतन होता है। लोग विवेकहीन और भ्रष्ट बनते है । हेरोइन-हशीश की गोलियाँ हीरे जैसे मानवजीवन को काँच का टुकड़ा बना देती हैं।

हमारा कर्तव्य

नशीले द्रव्यों के प्रसार रोकने के लिए केवल सरकार को ही नहीं, समाज एवं परिवार के सभी लोगों को भरकस प्रयत्न करना चाहिए । इस अभियान में समाचारपत्र, रेडियो, दूरदर्शन आदि साधनों से समुचित सहायता लेनी चाहिए । अन्यथा ये नशीले मादक द्रव्य मानवजाति के विनाश का कारण बन जाएँगे।

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