ग्रामसुधार हिंदी निबंध Gramsudhar Essay in Hindi

ग्रामसुधार हिंदी निबंध Gramsudhar Essay in Hindi: भारतीय सभ्यता और संस्कृति के सही रूप के दर्शन इने-गिने शहरों में नहीं, पर देश के सात लाख गाँवों में ही हो सकते हैं । गाँव भारत की आत्मा है। हमारे दैनिक जीवन में उपयोगी चीजों के लिए हमें गाँवों का आधार लेना पड़ता है। गांधीजी कहा करते थे, अगर देश की उन्नति चाहते हो तो उन गाँवों का सुधार करो, जो देश का जीवन है।’

ग्रामसुधार हिंदी निबंध Gramsudhar Essay in Hindi

ग्रामसुधार हिंदी निबंध Gramsudhar Essay in Hindi

ग्रामसुधार का स्वरूप

आजकल शिक्षा के प्रसार की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है तथापि अधिकतम ग्रामीणों के लिए काला अक्षर भैंस बराबर है। इसके फलस्वरूप वे पुरानी रूढ़ियों और धूतों के शिकार बने हैं। अतएव गाँवों में नि:शुल्क शिक्षा का अच्छा प्रबंध करना आवश्यक है। किसानों को कृषि के बारे में आधुनिक साधनों की मदद एवं उनके उपयोग की शिक्षा भी लाभदायक सिद्ध होगी। प्रौढ़ शिक्षा के लिए भी उचित व्यवस्था करनी होगी। हमारे गाँवों में स्वास्थ्य, चिकित्सा और मनोरंजन के उचित साधनों का बंदोबस्त करना भी आवश्यक है। गाँवों में सुंदर बगीचों का निर्माण करना चाहिए। प्रत्येक गाँव में कम से कम एक अच्छा दवाखाना भी होना चाहिए । गाँव में पुस्तकालय, रेडियो, दूरदर्शन और सिनेमा की भी व्यवस्था हो, ताकि गाँववालों को मनोरंजन के साथ ज्ञान भी मिलता रहे।

समाजसेवकों की प्रवृत्ति

गाँव में कार्यदक्ष समाजसेवकों को भेजकर श्रमदान आंदोलन चलाना चाहिए। इस प्रकार गाँव की सड़कें, तालाब, कुएँ आदि की मरम्मत शीघ्र हो सकती है। वहाँ बिजली की रोशनी के लिए भी व्यवस्था करनी होगी। समाजसेवकों को चाहिए कि वे गाँववालों को पुरानी हानिकारक परंपराओं को छोड़ने के लिए समझाएँ । मृत्युभोज तथा विवाह आदि प्रसंगों में जो धन पानी की तरह बहाया जाता है, उसका सदुपयोग करना जरूरी है। गंदगी और अस्पृश्यता मिटाने के लिए ठोस प्रयत्न करने चाहिए। सभी गाँवों में सहकारी बैंकों की स्थापना कामधेनु के समान सिद्ध होगी। इसके सिवा सरकार की तरफ से गाँववालों को उत्तम बीज, खाद, आधुनिक मशीनें आदि की सहायता भी मिलनी चाहिए। कुओं में पंप लगाए जाने चाहिए और नहरों की योजना भी बनानी चाहिए।

पंचायत आदि

गाँव में अच्छी पंचायतों की बड़ी आवश्यकता है । गाँवों के सभी छोटे-मोटे झगड़ों को इसी के द्वारा निपटाने की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। गाँवों की गरीबी और बेकारी की समस्या दूर करने के लिए छोटे-मोटे गृह-उद्योगों को प्रोत्साहन देना चाहिए । नवयुवकों को गाँवों की ओर आकृष्ट करने के लिए सरकार और नेताओं को भरसक प्रयत्न करने चाहिए।

उज्ज्वल भविष्य

पंचवर्षीय एवं सामुदायिक विकास-योजनाओं मे ग्रामसुधार को महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है, फिर भी अभी बहुत कुछ सुधार करना बाकी है । अतएव गाँवों की तरक्की के लिए देशव्यापी प्रयत्न करने चाहिए। सचमुच, गाँवों को उन्नति ही भारत की उन्नति है। जब भारत के गाँव मुसकराएँगे, तब भारत का भाग्य भी मुसकराएगा।

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