यदि मैं विद्यालय का प्रधानाचार्य होता हिंदी निबंध Essay on If I were a Principal of School in Hindi

Essay on If I were a Principal of School in Hindi: विद्यालयों में विद्यार्थियों को यदि उचित शिक्षा मिले तो वे अच्छे नागरिक, सच्चे समाजसेवक और आदर्श देशभक्त बन सकते हैं। किसी भी विद्यालय की उन्नति और सफलता मुख्याध्यापक पर निर्भर करती है। इसलिए यदि मैं अपने विद्यालय का मुख्याध्यापक या प्रधानाध्यापक होता तो अपने आपको बड़ा भाग्यशाली समझता, क्योंकि देशसेवा का ऐसा उत्तम अन्सर और कौन-सा हो सकता है?

यदि मैं विद्यालय का प्रधानाचार्य होता हिंदी निबंध Essay on If I were a Principal of School in Hindi

यदि मैं विद्यालय का प्रधानाचार्य होता हिंदी निबंध Essay on If I were a Principal of School in Hindi

अध्ययन के लिए उचित व्यवस्था

विद्यालय का मुख्याध्यापक या प्रधानाध्यापक बनकर मैं विद्यार्थियों के जीवन का सर्वागीण विकास करने के लिए भरसक प्रयत्न करता । मैं अपने विद्यालय में आदर्श अध्यापकों को नियुक्त करता, जो विद्यार्थियों को पढ़ाने में कुशल हों। विद्यालय में विज्ञान की अच्छी शिक्षा के लिए संपन्न प्रयोगशाला का आयोजन करता । मैं अपने विद्यालय के पुस्तकालय को बड़ा समृद्ध बनता।

अन्य प्रवृत्तियाँ

विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए मैं अपने विद्यालय में वाद-विवाद, संगीत, चित्रकला, वक्तृत्व आदि की प्रतियोगिताएँ रखता। हर कक्षा में विद्यार्थियों के लिए मैं शैक्षणिक पर्यटनों की व्यवस्था करता। मैं खेल-कूद और व्यायाम को यथोचित महत्त्व देता। अगर संभव होता तो विद्यार्थियों के लिए क्रीडांगण का प्रबंध भी करता।

चरित्रनिर्माण का आदर्श

मैं विद्यार्थियों के चरित्रनिर्माण और अनुशासन पर विशेष ध्यान देता। विद्यार्थियों में विनय, नियम-पालन, संयम, कर्तव्यनिष्ठा आदि गुणों के विकास के लिए मैं जी-जान से प्रयत्न करता। विद्यार्थियों की तकलीफों को दूर करने के लिए मैं हमेशा तैयार रहता और गरीब विद्यार्थियों की यथाशक्ति आर्थिक मदद करता।

कुछ सुधार

इसके अतिरिक्त मैं अपने विद्यालय के कार्यतंत्र और कार्यालय को सुव्यवस्थित बनाता । विद्यालय में मैं एक बढ़िया उपाहरगृह और समृद्ध पुस्तकभंडार को भी व्यवस्था करता।

अध्यापक, कर्मचारी आदि से अच्छा व्यवहार

मैं स्वयं अपनी सादगी, नियमितता, कर्तव्यनिष्ठा आदि से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करने का प्रयत्न करता। विद्यालय के सभी अध्यापको और अन्य कर्मचारियों के प्रति मेरा व्यवहार स्नेहमय और सहानुभूतिपूर्ण होता। फिर भी अध्यापकगण एवं विद्यालय के अन्य कर्मचारियों में किसी तरह की लापरवाही को मैं बर्दाश्त न करता। मैं विद्यार्थियों के माता-पिता और पालकों के प्रति आदरपूर्ण व्यवहार करता और उनके सुझावों तथा शिकायतों की ओर उचित ध्यान देता।

मेरा आदर्श

इस प्रकार मुख्याध्यापक या प्रधानाध्यापक बनकर मैं अपने विद्यालय को हर तरह से एक आदर्श विद्यालय बनाने की कोशिश करता। क्या मैं अपनी इन अभिलाषाओं को पूर्ण कर पाऊँगा?

Share on:

इस ब्लॉग पर आपको निबंध, भाषण, अनमोल विचार, कहानी पढ़ने के लिए मिलेगी |अगर आपको भी कोई जानकारी लिखनी है तो आप हमारे ब्लॉग पर लिख सकते हो |

Leave a Comment