यदी परीक्षा ना होती हिंदी निबंध If there were no Exams Essay in Hindi

यदी परीक्षा ना होती हिंदी निबंध If there were no Exams Essay in Hindi: आजकल विद्यार्थियों को परीक्षाओं का लगातार सामना करना पड़ता है। यहाँ तक कि उन दम लेने का भी अवकाश नहीं मिलता। साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षाओं का भूत उन पर हमेशा सवार रहता है। अगर ये परीक्षाएँ न होती तो सभी विद्यार्थी मारे खुशी के फूले न समाते । परीक्षा की बला उनके सिर पर न होने से वे सदा ‘ पिकनिक ‘, ‘पार्टी और ‘पिक्चर’ का मजा लूटते रहते । फिर दिन-रात एक करके आँख फोड़ने की उन्हें क्या जरूरत पड़ती? परीक्षा के अभाव में उनकी पाँचों अँगुलियाँ घी में होती।

यदी परीक्षा ना होती हिंदी निबंध If there were no Exams Essay in Hindi

यदी परीक्षा ना होती हिंदी निबंध If there were no Exams Essay in Hindi

सच्चे ज्ञान और विद्या के उपासक पैदा होने

ये परीक्षाएँ विद्यार्थी के ज्ञान की नहीं, किंतु उनकी स्मरणशक्ति की कसौटी हैं। परीक्षाओं के कारण ही विद्यार्थी केवल मार्गदर्शिकाओं पर निर्भर रहने लगते हैं, उनमें विषय का गहरा ज्ञान पाने की इच्छा नहीं रहती । परीक्षा के लिए अपेक्षित या महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के पीछे वे पागल से हो जाते हैं। किसी भी तरह परीक्षा पास करना और प्रमाणपत्र प्राप्त करना ही उनका ध्येय हो गया है। यदि वे परीक्षाएँ न होतीं, तो बेचारे विद्यार्थियों को डिग्रियाँ पाने के लिए सिर न खपाना पड़ता।

परीक्षा के अनिष्ट परिणाम

यदि परीक्षाएँ न होती तो मध्यम वर्ग के लोगों को पेट काटकर ट्यूशन रखने की आवश्यकता न होती । माता-पिता बार-बार अपनी संतानों को पढ़ाई के लिए न टोकते, फिर तो परीक्षकों को रिश्वत देने की नौबत भी न आती और परीक्षकों की लापरवाही से विद्यार्थियों के जीवन बरबाद न होते । विद्यार्थियों को परीक्षा-भवन में नकल करने की जरूरत ही न पड़ती। इतना ही नहीं, परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर आत्महत्या करने की करुण घटनाएँ भी न घटती। परीक्षा के न होने पर विद्यार्थी चिंतामुक्त होकर विविध खेलों में भाग लेते । वे संगीत, नृत्य, नाट्य आदि ललितकलाओं में कुशलता प्राप्त करते। विद्यार्थी केवल किताबी कीड़े ही न रहकर अपना सर्वांगीण विकास कर पाते।

परीक्षा का महत्व

किंतु यह तो सिक्के का एक ही पहलू है । यदि परीक्षाएँ न होती तो सभी विद्यार्थियों को अगली श्रेणी में प्रवेश देना पड़ता । तब उनकी योग्यता का पता कैसे लगाया जाता? बिना परीक्षा के अनेक विद्यार्थी लापरवाह हो जाते और वे कभी किसी विषय को पढ़ने का कष्ट हो न उठाते। परीक्षा के माध्यम से ही विद्यार्थी अपनी योग्यता को परख सकते हैं, जिससे उनमें एक प्रकार की लगन और प्रेरणा बनी रहती है। इस तरह परीक्षा बिल्कुल अनावश्यक नहीं है।

उपसंहार

अत: व्यावहारिक दृष्टि से परीक्षाएँ अनिवार्य है। उनके न होने की कल्पना भले ही रमणीय हो, किंतु सार्थक नहीं है।

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