अगर देश मे पुलिस न हो हिंदी निबंध If there were no Police Essay in Hindi

अगर देश मे पुलिस न हो हिंदी निबंध If there were no Police Essay in Hindi: हमारे वर्तमान जीवन में पुलिस का बड़ा महत्त्व होता है। देश और समाज की सुरक्षा और शांति के लिए पुलिस की सेवाएँ आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य भी हैं। इस दशा में पुलिस के अभाव की कल्पना विचित्र एवं असंगत-सी अवश्य लगती है।

अगर देश मे पुलिस न हो हिंदी निबंध If there were no Police Essay in Hindi

अगर देश मे पुलिस न हो हिंदी निबंध If there were no Police Essay in Hindi

वाहन-व्यवहार में अव्यवस्था

पुलिस रास्तों पर वातायात का नियंत्रण करती है। उसीके संकेत के अनुसार टैक्सियाँ, मोटरें, बसें, ट्रकें, मालगाड़ियाँ आदि चलती या रुकती है, पुलिस के प्रबंध के कारण ही लोग सरलता से रास्ता पार कर सकते हैं और दुर्घटना से बच सकते हैं। अगर पुलिस न होती तो शहरों में वाहनव्यवहार पर कोई नियंत्रण ही न रहता। जल्दबाजी में रोज न जाने कितनी दुर्घटनाएं होती और कितने लोग उनके शिकार हो जाते !

समाज-विरोधी तत्त्व

पुलिस लोगों के जान-माल की रक्षा करती है। आजकल चोर, लुटेरे, शराबी, जुआरी आदि की कमी नहीं । इन समाजविरोधी तत्त्वों से लोगों को बचाना पुलिस का फर्ज है। जो लोग कायदे-कानूनी का उल्लंघन करते हैं उन्हें पुलिस पकड़ती है। अगर पुलिस न होती तो चोर-उचक्कों का ही राज हो जाता । फिर तो शराब की बोतलों की धूम मच जाती। पुलिस के न रहने पर डाकू दिन-रात लोगों, घरों, दुकानों और बैंकों को लूटते रहते । लोग बात-बात में हत्या पर उतारू हो जाते । इस प्रकार पुलिस के न रहने पर समाज में बड़ी अव्यवस्था फैल जाती, जिससे भले आदमियों के लिए जीना भी मुश्किल हो जाता।

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सुख-शांति का अभाव

बड़े-बड़े जुलूस, सभा या मेलों के समय पुलिस की सेवाएँ विशेष रूप से आवश्यक होती हैं। दुर्घटनाओं में भी पुलिस लोगों की बड़ी सहायता करती है। साधारण लड़ाई झगड़ों को निबटाने का काम भी पुलिस ही करती है। पुलिस की इन सेवाओं से हमारा जीवन अधिक सुरक्षित और शांतिमय बना रहता है। अगर पुलिस न होती तो समाज को पलभर के लिए भी सुख-चैन नसीब न होता।

पुलिस के अभाव का एक लाभदायक पहलू भी है। यदि पुलिस न होती तो उस पर खर्च होनेवाले देश के लाखों रुपये बच जाते। तब वे रुपये सार्वजनिक कार्यों के लिए खर्च हो पाते। सदा चोर-डाकुओं का भय बना रहने के कारण लोग अधिक सावधान रहते, बहादुर बनते और अपने जान-माल की रक्षा के उपाय स्वयं करते।

उपसंहार

लेकिन इन थोड़े-से लाभों से पुलिस का महत्त्व घटता नहीं। अब भी मनुष्य की पशुता का पूरा नाश नहीं हुआ है। इस परिस्थिति में अगर पुलिस न होती तो हमारा व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन अशांत और असुरक्षित बन जाता। फिर तो हम चैन की साँस न ले पाते। सच तो यह है कि पुलिस हमारे जीवन का एक अंग बन गई है। उसके अभाव या अनुपस्थिति की हम कल्पना ही नहीं कर सकते।

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