Indian national trademark essay in Hindi language | भारत का राष्ट्रीय चिन्ह हिंदी निबंध

Indian national trademark essay in Hindi language हमारे भारत देश का एक राष्ट्रीय चिन्ह है| प्रत्येक राष्ट्र के कुछ राष्ट्रीय प्रतीक होते हैं| ये प्रतीक उस राष्ट्र की पहचान होते हैं और उसकी स्वतंत्रता एवं अस्मिता का बोध कराते हैं| भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है और इसके भी कुछ राष्ट्रीय प्रतीक हैं| हमारे देश के पाँच विशिष्ट प्रतीक हैं- राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान, राष्ट्रचिह्न, राष्टीय पक्षी और राष्ट्रीय पशु| इनके माध्यम से भारत के राष्ट्रीय स्वरूप की पहचान होती है| सभी भारतवासी इन राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और निष्ठा की भावना रखते हैं|

भारत ने तिरंगे झंडे को राष्ट्रध्वज के रूप में अपनाया| यह तिरंगा ध्वज भारत के स्वाधीनता संग्राम में हमारे संघर्ष का प्रतीक था| इसका केसरिया रंग त्याग, बलिदान और शौर्य का परिचायक है, बीच का सफेद रंग शांति और पवित्रता का द्योतक है तथा हरा रंग देश की धरती की उर्वरता एवं हरियाली का प्रतीक है| चक्र जीवन की गतिशीलता का प्रतीक है| कविवर रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित ‘जन-गण-मन’ गीत हमारा राष्ट्रगान है| भारत का राष्ट्रचिह्न सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिया गया है|

इसका प्रयोग केवल सरकारी कार्यों के लिए ही हो सकता है| मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है और बाघ हमारा राष्ट्रीय पश है| हमारे ये राष्ट्रीय प्रतीक हमारी सांस्कृतिक अस्मिता की व्यापक पहचान कराते हैं| ये सभी देश को गौरवमयी परंपराओं एवं जीवन-मूल्यों को उजागर करते हैं| अशोक चिन्ह भारत का राजकीय प्रतीक है| इसको सारनाथ स्थित राष्ट्रीय स्तंभ का शीर्ष भाग राष्ट्रीय प्रतिज्ञा चिन्ह के रूप में लिया गया है| मूल रूप इसमें चार शेर हैं जो चारों दिशाओं की ओर मुंह किए खड़े हैं|

इसके नीचे एक गोल आधार है जिस पर एक हाथी के एक दौड़ता घोड़ा, एक सांड़ और एक सिंह बने हैं| ये गोलाकार आधार खिले हुए उल्टे लटके कमल के रूप में है| हर पशु के बीच में एक धर्म चक्र बना हुआ है| राष्‍ट्र के प्रतीक में जिसे 26 जनवरी 1950 में भारत सरकार द्वारा अपनाया गया था केवल तीन सिंह दिखाई देते हैं और चौथा छिपा हुआ है, दिखाई नहीं देता है| चक्र केंद्र में दिखाई देता है, सांड दाहिनी ओर और घोड़ा बायीं ओर और अन्‍य चक्र की बाहरी रेखा बिल्‍कुल दाहिने और बाई छोर पर| घंटी के आकार का कमल छोड़ दिया जाता है|

प्रतीक के नीचे सत्यमेव जयते देवनागरी लिपि में अंकित है| शब्‍द सत्‍यमेव जयते शब्द मुंडकोपनिषद से लिए गए हैं, जिसका अर्थ है केवल सच्‍चाई की विजय होती है| भारतीय रुपए का प्रतीक चिन्ह 17  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान तथा आर्थिक संबलता को परिलक्षित कर रहा है| रुपए का चिन्ह भारत के लोकाचार का भी एक रूपक है| रुपए का यह नया प्रतीक देवनागरी लिपि के ‘र’ और रोमन लिपि के अक्षर ‘आर (R)’ को मिला कर बना है,(₹) जिसमें एक क्षैतिज रेखा भी बनी हुई है|

यह रेखा हमारे राष्ट्रध्वज तथा बराबर (=) के चिन्हको प्रतिबिंबित करती है| भारत सरकार ने 15 जुलाई 2010 को इस चिन्ह को स्वीकार कर लिया है| यह चिन्ह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई के पोस्ट ग्रेजुएट डिजाइन श्री डी. उदय कुमार ने बनाया है| इस चिह्न को वित्त मंत्रालय द्वारा आयोजित एक खुली प्रतियोगिता में प्राप्त हजारों डिजायनों में से चुना गया है| इस प्रतियोगिता में भारतीय नागरिकों से रुपए के नए चिन्हके लिए डिजाइन आमंत्रित किए गए थे| भारतीय रुपये को एक विशेष प्रतीक मिलने के बाद अब यह अन्य प्रायद्वीपीय मुद्राओं से अलग एवं विशिष्ट बन चुकी है|

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