भारतीय खेल हिंदी निबंध Indian Sports Essay in Hindi

भारतीय खेल हिंदी निबंध Indian Sports Essay in Hindi: खेल मनोरंजन के उत्तम साधन हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उनका महत्त्वपूर्ण स्थान है। मानसिक श्रम करनेवालों के लिए तो खेल ‘टॉनिक’ का काम देते हैं।

भारतीय खेल हिंदी निबंध Indian Sports Essay in Hindi

भारतीय खेल हिंदी निबंध Indian Sports Essay in Hindi

खेलों के प्रकार

कुछ खेल बच्चों के लिए होते हैं, तो कुछ बड़ों के लिए। कुछ खेल बच्चे-बूढ़े सभी खेल सकते हैं। कुछ खेल खुले मैदानों में खेले जाते हैं और कुछ खेल ऐसे हैं जो घर में भी खेले जा सकते है। आजकल हमारे देश में दो प्रकार के खेल प्रचलित हैं : देशी या भारतीय खेल और विदेशी या विलायती खेल।

भारतीय खेल विदेशी खेलों से तुलना

आजकल हमारे शहरों में विदेशी खेलों का बोलबाला है। भारतीय खेलों के दर्शन प्राय: हमें गाँवों में ही होते हैं। भारतीय खेलों में कबड्डी और गुल्ली-डंडे का स्थान सबसे ऊँचा है । कबड्डी का खेल केवल गाँवों में ही नहीं, शहरों में भी बहुत प्रचलित है। विद्यालयों तथा महाविद्यालयों में कबड्डी के मैच उत्साहपूर्वक खेले जाते हैं। गुल्ली-डंडा ग्रामीण युवकों और बालों का प्रिय खेल है। खो-खो, चीलझपट, कोड़ामार आदि खेल भी यहाँ के बालक बड़े चाव से खेलते हैं। आँख-मिचौनी, किलकिल-काँटा आदि खेल सामूहिक रूप से खेले जाते हैं। ताश, शतरंज, चौपड़ आदि घरेलू खेल हैं, जिनमें बुद्धि और चतुराई का विशेष उपयोग करना पड़ता है। ये सभी खेल बड़े मनोरंजक और दिलचस्प है।

भारतीय खेलों की विशेषताएँ

विदेशी खेलों में क्रिकेट और हॉकी अतीव लोकप्रिय है। इन खेलों के पीछे सैकड़ों रुपये खर्च किए जाते है। उसी प्रकार टेनिस, वॉलीबॉल, बैडमिंटन आदि खेलों को भी विशेष महत्त्व दिया जाता है। आजकल अधिकांश लोग विदेशी खेलों के मोह में पड़कर भारतीय खेलों की उपेक्षा करते हैं, किंतु भारतीय खेलों को भी अपनी अनेक विशेषताएँ हैं। क्या हमारे खेलों में मनोरंजन की शक्ति नहीं है? क्या वे एकता और जिंदादिली पैदा करने में असमर्थ है? शारीरिक और बौद्धिक विकास करने में वे विदेशी खेलों से किस दृष्टि से पीछे हैं?

हमारा कर्तव्य

‘टीम स्पिरिट’ पैदा करने में कबड्डी का खेल अपना सानी नहीं रखता । गुल्ली-डंडे में वह मिठास है, जो दूसरे खेलों में दुर्लभ है। उसमें जो लगन, जो मस्ती भरी है, वह टेनिस और बैडमिंटन में कहाँ? भारतीय खेल बड़ी सरलता से खेले जा सकते हैं । न उनमें लॉन की जरूरत है, न नेट की। उन्हें खेलने के लिए विशेष स्थान या वातावरण की भी जरूरत नहीं पड़ती। विदेशी खेलों में प्रायः खिलाड़ियों की संख्या निश्चित रहने से इने-गिने व्यक्ति हाँ इनसे आनंद प्राप्त कर सकते हैं, पर भारतीय खेलों में अनेक व्यक्ति एक-साथ हिस्सा ले सकते हैं। समभाव और स्नेह बढ़ाने में भी भारतीय खेलों की तुलना विदेशी खेल नहीं कर सकते।

उपसंहार

विदेशी खेलों की अच्छी बातें अपनाते हुए भी हमें भारतीय खेलों Indian Sports में अधिक रुचि लेनी चाहिए। भारतीय आत्मा भारतीय खेलों में ही सहजता और आत्मीयता से रम सकती है। सचमुच, भारतीय खेल हमारे सुस्त जीवन में नया उत्साह, नया उल्लास और नया आनंद भर देते हैं।

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