पुस्तकालय हिंदी निबंध Library Essay in Hindi

पुस्तकालय हिंदी निबंध Library Essay in Hindi: संसार में ज्ञान के समान पवित्र और कोई वस्तु नहीं है। मनुष्य ऐसे पवित्र ज्ञान को नाना प्रकार के साधनों से प्राप्त करता है। उनमें पुस्तकालय भी एक महत्त्वपूर्ण साधन है।

पुस्तकालय हिंदी निबंध Library Essay in Hindi

पुस्तकालय हिंदी निबंध Library Essay in Hindi

आवश्यकता

आए दिन हजारों पुस्तकें छपकर प्रकाशित होती हैं। किसी भी एक व्यक्ति के लिए इन सब पुस्तकों को खरीदना संभव नहीं है। पुस्तकालय मनुष्य की इस समस्या को बड़ी सरलता से हल कर देता है। प्रति मास या वर्ष के लिए साधारण शुल्क देकर हम पुस्तकालय के इस अनोखे स्वर्ग में प्रवेश पा सकते हैं । विश्व में साहित्य, कला, विज्ञान, तर्क, नीति आदि के ज्ञान का जो विशाल भंडार भरा पड़ा है, उसका अनुमान पुस्तकालय में बैठकर ही हो सकता है । अच्छे पुस्तकालय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ किसी भी विषय पर पूर्ण या अधिक से अधिक सामग्री प्राप्त हो सकती है।

ज्ञानप्राप्ति और मनोरंजन का साधन

समय के सदुपयोग के लिए पुस्तकालय से बढ़कर कोई अन्य उत्तम स्थान नहीं है। अवकाश का समय ताश, शतरंज, सिनेमा आदि में बिताने के बदले ‘कालिदास, भवभूति, सूरदास, तुलसीदास, शेक्सपियर आदि के काव्य-ग्रंों का रसास्वादन करने में व्यतीत किया जाए तो अच्छा मनोरंजन प्राप्त हो सकता है और हमारे ज्ञान में भी वृद्धि होती है। दैनिक, साप्ताहिक या मासिक पत्रिकाओं को पढ़ने से सामान्य ज्ञान का विकास होता है । कथा-कहानी, उपन्यास, नाटक आदि मनुष्य कितने चाव से पढ़ता है ! जीवन को अमृतमय बनानेवाले उत्तम ग्रंथों का अध्ययन पुस्तकालय में बैठकर सरलता से किया जा सकता है। वास्तव में बौद्धिक विकास में पुस्तकालय का योगदान सबसे अधिक है। गाँव-गाँव घूमकर पुस्तकें बाँटनेवाले चलते-फिरते पुस्तकालय ग्रामसुधार के लिए बड़े उपयोगी सिद्ध हुए हैं।

पुस्तकालय के आदर्श

पुस्तकालय का सदस्य-शुल्क बहुत कम होना चाहिए। पुस्तकालयों में ज्ञानविज्ञान संबंधी नए-नए पुस्तकों का संग्रह होते रहना चाहिए। हमारे देश के बहुत-से पुस्तकालयों में वर्षों पुरानी पुस्तकें दीमक और किड़ों-मकोड़ों का भोजन बन रही हैं और नई, संशोधित पुस्तकों के दर्शन तक नहीं होते हैं। पुस्तकालय के व्यवस्थापकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए। पुस्तकालय पूर्ण रूप से सार्वजनिक होना चाहिए।

महत्त्व

दुर्भाग्य से अन्य देशों की तुलना में हमारे देश में पुस्तकालयों की संख्या और गुणवत्ता कम है। गाँवों में तो पुस्तकालय नहीं के बराबर हैं । व्यक्ति, समाज और देश की प्रगति में पुस्तकालय बहुत सहायक हो सकते हैं । अतः जगह-जगह उनको स्थापना की जानी चाहिए।

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