साहित्य और समाज हिंदी निबंध Literature and Society Essay in Hindi

साहित्य और समाज हिंदी निबंध Literature and Society Essay in Hindi: प्रत्येक युग में और प्रत्येक देश में कुछ व्यक्ति विशेष प्रतिभा, प्रज्ञा और संवेदनशीलता लेकर जन्म लेते हैं। उनमें अपने युग, समाज, प्रकृति और आसपास की प्रवृत्तियों को जानने-समझने की विशेष शक्ति होती है। वे अपने विचारों और भावनाओं को कलात्मक ढंग से अभिव्यक्ति कर सकते हैं। कवि और लेखक इसी तरह के व्यक्ति होते हैं। उनकी अभिव्यक्ति ही साहित्य का रूप लेती है । इस प्रकार साहित्य विद्वानों और मनीषियों के ज्ञान का भंडार होता है। साहित्य को समाज से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

साहित्य और समाज हिंदी निबंध Literature and Society Essay in Hindi

साहित्य और समाज हिंदी निबंध Literature and Society Essay in Hindi

समाज का साहित्य पर प्रभाव

साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है । साहित्यकार समाज में रहता है। समाज के रीति-रिवाजों और मान्यताओं से उसका परिचय होता है। अपने समय की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्थितियाँ उसे गहराई तक प्रभावित करती है। अमीरों की शान और गरीबों की पीड़ा उसके दिल को छू लेती है। युद्ध, क्रांति जैसी अपने समय की घटनाएँ उसे झकझोर देती हैं। उसके साहित्य में इन सब बातों का प्रभाव देखा जा सकता है। रामायण और महाभारत में तत्कालीन आर्यों की सभ्यता और संस्कृति होते हैं। कालिदास और शेक्सपियर के नाटकों में उनके समय के समाज की झलक मिलती है।

साहित्य समाज का केवल प्रतिबिंब ही नहीं है। वह समाज को प्रभावित भी करता है। मुगलकाल में भारतीय जनता अपनी राजनीतिक पराधीनता के कारण पूरी तरह निराश हो गई थी। उस समय तुलसीदास की ‘रामचरितमानस’, स्वामी रामदास की ‘दासबोध’ आदि रचनाओं ने उसे बड़ा सहारा दिया था। फ्रांस की महान राज्यक्रांति के पीछे वहाँ के रूसो, वाल्टेयर और मोन्टेस्क्यू जैसे क्रांतिकारी लेखकों का बड़ा हाथ था। रूस के सामाजिक परिवर्तन में गोर्की, टॉल्स्टॉय और कार्ल मार्क्स की कलम की शक्ति ने बहुत काम किया था। हिटलर के बारूदी विचारों ने ही जर्मनवासियों को उत्तेजित करके दूसरे विश्वयुद्ध की भूमिका तैयार की थी। हमारे देश के क्रांतिकारी साहित्य ने हमारे स्वातंत्र्य-वीरों को बड़ी प्रेरणा दी थी। ‘कदम कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा’ तथा ‘वंदे मातरम्’ जैसे गीतों ने भारतीय जनमानस को आंदोलित कर दिया था। बाइबिल तथा कुरान के सामाजिक प्रभाव को कौन नहीं जानता?

विकृत साहित्य का प्रभाव

साहित्य में गजब की शक्ति होती है। अच्छा साहित्य समाज पर अच्छा असर डालता है। बेकन जैसे विचारकों के जानदार निबंध समाज को शिष्ट बनाने का सुंदर काम करते हैं। मानवतावादी साहित्य ही समाज को ‘सत्यं शिवं सुंदरम् ‘ का मार्ग बताता है और महात्मा फुले तथा महर्षि कर्वे जैसी विभूतियों को जन्म देता है। इसके विपरीत बुरा समाज को भ्रष्ट बनाता है। दुर्भाग्य से पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव से हमारे यहाँ भी अश्लील साहित्य को लोकप्रियता मिल रही है। ऐसा साहित्य हमारी पशुता को भड़काकर समाज को पतन की ओर ही ले जाता है।

उपसंहार

कुछ भी हो, साहित्य और समाज Literature and Society में चोली-दामन का संबंध है। अच्छे और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए श्रेष्ठ, संस्कारी और प्रगतिवादी साहित्य की बड़ी आवश्यकता है।

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