Man ki Hare Har Hai Man Ki Jeet Jeet essay in Hindi language | मन की हारे हार है मन के जीते जीत हिंदी निबंध

Man ki Hare Har Hai Man Ki Jeet Jeet essay in Hindi language मनुष्य को अपने जीवन में अनियमित हार और जीत का संघर्ष करना पडता है| मतलब मनुष्य का जिवंत अनेक प्रकार की संकट ओ से घरे रहता है| अगर इन्सान कटो मे भी मनुष्य अपने मन को हारे माने तो उसकी हार है और संकट होते हुए भी मनुष्य अपने मन को जीते तो उसकी जीत है|

संस्कृत की एक कहावत है,
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः

अर्थात् मन ही मनुष्य के बन्धन और मोक्ष का कारण है| तात्पर्य यह है कि मन ही मनुष्य को सांसारिक बन्धनों में बाँधता है और मन ही बन्धनों से छुटकारा दिलाता है| यदि मन न चाहे तो व्यक्ति बड़े से बड़े बन्धनों की भी उपेक्षा कर सकता है| शंकराचार्यने कहा है कि “जिसने मन को जीत लिया, उसने जगत् को जीत लिया|” मन ही मनुष्य को स्वर्ग या नरक में बिठा देता है| स्वर्ग या नरक में जाने की कुंजी भगवानने हमारे हाथों में ही दे रखी है|

दुःख–सुख सब कहँ परत है, पौरुष तजहु न मीत |
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत ||

अर्थात दुःख और सुख तो सभी पर पड़ा करते हैं, इसलिए अपना पौरुष मत छोड़ो, क्योंकि हार और जीत तो केवल मन के मानने अथवा न मानने पर ही निर्भर है, अर्थात् मन के द्वारा हार स्वीकार किए जाने पर व्यक्ति की हार सुनिश्चित है| इसके विपरीत यदि व्यक्ति का मन हार स्वीकार नहीं करता तो विपरीत परिस्थितियों में भी विजयश्री उसके चरण चूमती है| जय–पराजय, हानि–लाभ, यश–अपयश और दुःख–सुख सब मन के ही कारण हैं; इसलिए व्यक्ति जैसा अनुभव करेगा वैसा ही वह बनेगा|

मन की दृढ़ता के कुछ उदाहरण हमारे सामने ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जिनमें मन की संकल्प–शक्ति के द्वारा व्यक्तियों ने अपनी हार को विजयश्री में परिवर्तित कर दिया| महाभारत के युद्ध में पाण्डवों की जीत का कारण यही था कि श्रीकृष्ण ने उनके मनोबल को दृढ़ कर दिया था| नचिकेता ने न केवल मृत्यु को पराजित किया, अपितु यमराज से अपनी इच्छानुसार वरदान भी प्राप्त किए| सावित्री के मन ने यमराज के सामने भी हार नहीं मानी और अन्त में अपने पति को मृत्यु के मुख से बचाया|

मन के हारने से जीती हुई बाजी भी हार में बदलते देर नहीं लगती| यदि हम अपने प्रतिद्वंद्वी का सामना डटकर करेंगे, तो वह हमें दबा नहीं पाएगा, हमारे ऊपर अत्याचार नहीं कर पाएगा, लेकिन जैसे ही हम डरकर हार मान लेते हैं, सामने वाला व्यक्ति इस बात को समझ जाता है|

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
परमात्मा को पाइये, मन ही के परतीत।

मनुष्य मन के विश्वास से ही ईश्वर को भी पा सकता है| मन के हारते ही हिम्मत टूट जाती है, शरीर निष्क्रिय हो जाता है, लेकिन जब तक मन नहीं हारता, तब तक शरीर में भी अदम्य साहस भरा रहता है| लोगों की सोच का सीधा सम्बन्ध उसके मस्तिष्क से होता है| अगर वह नकारात्मक सोच रखता है तो परिणाम भी नकारात्मक होते हैं और स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है| इसी के विपरीत यदि मनुष्य ये सोचे कि वह सारे कार्यों को साकार कर सकता है, सकारात्मक सोच रखता है तो कई सारी समस्याएं हल हो सकती हैं|

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