एक अकालग्रस्त गाँव की मुलाकात हिंदी निबंध Meeting Famine Stricken Village Essay in Hindi

Meeting Famine Stricken Village Essay in Hindi: अकाल अर्थात अनावृष्टि प्रकृति के निष्ठुर रूपों में से एक है। पिछले वर्ष गुजरात के कई भागों में भयानक अकाल के मर्मातक समाचार पढ़कर मेरे मन में अकालग्रस्त क्षेत्र देखने की तीव्र उत्कंठा जाग उठी। ग्रीष्मावकाश में मैं भावनगर जिले में स्थित अपने मामा के गाँव पहुँच गया। वहाँ का पूरा क्षेत्र बुरी तरह भयानक सूखे की चपेट में आ गया था।

एक अकालग्रस्त गाँव की मुलाकात हिंदी निबंध - Meeting Famine Stricken Village Essay in Hindi

एक अकालग्रस्त गाँव की मुलाकात हिंदी निबंध – Meeting Famine Stricken Village Essay in Hindi

प्रकृति का प्रकोप

पिछले वर्ष भी बादल इस क्षेत्र को रूठे ही रहे थे। जब-तब थोड़ी बहुत बूंदाबांदी हुई थी। पर इस वर्ष तो यहाँ के आकाश में मेघ के दर्शन ही नहीं हुए थे। कोमल हृदयवाली वर्षारानी इतनी कठोरहृदय बन गई कि उसने इस ओर दृष्टिपात तक नहीं किया।

क्षेत्र की दुर्दशा

ओह ! गायों और भैसों की हड्डी-हड्डी निकल आई थी । कहीं कहीं तो मृत पशु-पक्षियों की लाशें पड़ी हुई थीं । केवल धनी किसान ही किसी तरह निभा रहे थे, नहीं तो सारे गाँव में भूख अपना तांडव कर रही थी। गरीबों के शरीर कंकाल में बदल रहे थे। सबके चेहरों पर भय और विषाद की छाया थी। मंदिरों में वृष्टि के लिए यज्ञ अनुष्ठान आदि का आयोजन हो रहा था।

पानी की भीषण तंगी

गाँव में पानी की भयानक तंगी थी । गाँव के अधिकांश कुएँ सूख गए थे। बाकी कुओं के तल दिखाई दे रहे थे। गाँव की स्त्रियाँ मटके पर मटके लादकर दूर दूर मीलों चलकर यहाँ-वहाँ से पानी लाती थी । जो पानी मिलता था, वह पीने के लिए भी पर्याप्त न होता था । ऐसी दशा में नहाने-धोने की भीषण समस्या थी। मुझ जैसे नित्य स्नान करनेवाले व्यक्ति के लिए वहाँ रहना बड़ा कठिन लगा। पानी की बूंद-बूंद मोती की तरह कीमती बन गई थी।

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अकाल की भयानकता

गाँव और उसके आसपास के पेड़ सूखकर अपने दुर्भाग्य पर आँसू बहा रहे थे। धरती सूखकर पत्थर-सी कठोर बन गई थी। कहीं हरियाली का नामोनिशान न था। सूखे खेत चुपचाप आकाश से जल की याचना करते थे। सर्वत्र शमशान जैसी खामोशी छाई हुई थी।

सरकार की ओर से सहायता

इस घोर संकट में केंद्र और प्रांत की सरकार द्वारा जगह-जगह राहतकार्य शुरू किए गए थे। इनमें लोगों को काम दिया जा रहा था। लोगों को अन्न और धन दोनों के रूप में मदद दी जाती थी । जलसंकट दूर करने के लिए सरकार की ओर से नए कुएँ खुदवाए जा रहे थे और पुराने कुओं को अधिक गहरा किया जा रहा था। कुछ समाजसेवी संस्थाएँ भी अन्न और वस्त्र के रूप में लोगों को राहत पहुँचा रही थीं । सरकार की ओर से पानी पहुँचाने के लिए एक विशेष रेलगाड़ी आरंभ की गई थी।

संदेश

सचमुच, अकाल को राष्ट्रीय समस्या के रूप में देखना चाहिए। पंचवर्षीय योजनाओं में अकाल निवारण के लिए विशेष व्यवस्था करनी चाहिए। जब तक अकाल-निवारण के ठोस और दीर्घकालीन उपाय नहीं किए जाएँगे तब तक अकाल-पीड़ितों को मृत्यु की छाया में ही जीना पड़गा।

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