Mera Priya Paryatan sthal essay in Hindi language | मेरा प्रिय पर्यटन स्थळ कश्मीर

Mera Priya Paryatan sthal essay in Hindi language कश्मीर मेरा पर्यटन स्थल है मुझे कश्मीर में घुमना बहुत पसंद है| कश्मीर में घुमने के लिए अनेकों पर्यटक स्थल है जैसै गुलमार्ग, सोनमर्ग, पटनाटाप आदि| गुलमर्ग को कश्मीर की जान कहा जाता है| कोई भी व्यक्ति कश्मीर जाए तो यहाँ पक्का ही जाता है| कश्मीर में वूलर जैसे बहुत से सरोवर है जो इसकी सुंदरता में चार चाँद लगाते है|

कश्मीर उत्तर भारत में झेलम नदी की घाटी पर स्थित है| कशमीर की सुंदरता देखते ही बनती है इसे दुनिया का स्वर्ग भी कहा जाता है| माना जाता है कि पहले यहाँ पर शिवजी की पत्नी सती रहती थी और चारों तरफ पानी ही पानी हुआ करता था| लेकिन वहा पर राक्षस के वद के बाद सारा पानी झेलम नदी के माध्यम से बहा दिया गया और तभी से इसका नाम सतीवर से कश्मीर पड़ा|

कश्मीर हर मौसम में बहुत ही सुंदर दिखाई देता है| इसकी इसी सुंदरता को देखने दुर दुर से लोग आते है| गर्मीयों में यहाँ पर हरियाली देखने को मिलती है तो सर्दीयों में चारों तरफ बर्फ और बर्फ में खेलते लोग| पेड़ो पर लगे लाल लाल सेब बहुत ही अच्छे लगते है| आंतकवाद के समय में भी कश्मीर का बर्फ से ढका हुआ नजारा लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर ही लेता है| वहाँ पर जाने वाला हर व्यक्ति यही कहता है कि असली जन्नत को यहीं पर है|

कश्मीर में रहने वाले लोगों को कश्मीरी पंडीत कहा जाता है| जो कि मांसाहारी भी होते है| उनके खाने के व्यंजन मुख्यतः कबाब आदि होते है| कश्मीर में खाने के बाद मिठाई में फिरनी दी जाती है| कश्मीर के लोग देखने में बहुत ही खुबसुरत होते है| कश्मीर के सेब पूरे भारत में प्रसिद्ध है| अगर कोई भी वहाँ घुमने जाता है तो अखरोट की लकड़ी से बने शौ पीस, पशमीना शाल, केसर, सेब आदि पक्का खरीद कर लाता है|

कश्मीर में आंतकवाद बहुत ही ज्यादा है| आजादी के बाद से कश्मीर भारत का हिस्सा रहा है| लेकिन पाकिस्तान उस पर अपना हक जमा रहा है जिसके चलते कश्मीर में हर रोज आंतकवाद के किस्से सुनने को मिलते है| यहा की संस्कृती सूफ़ी-परम्परा बहुत विख्यात है, जो कश्मीरी इस्लाम को परम्परागत शिया और सुन्नी इस्लाम से थोड़ा अलग और हिन्दुओं के प्रति सहिष्णु बना देती है| कश्मीरी हिन्दुओं को कश्मीरी पण्डित कहा जाता है और वो सभी ब्राह्मण माने जाते हैं| सभी कश्मीरियों को कश्मीर की संस्कृति, यानि कि कश्मीरि
यतपर बहुत नाज़ है|

वादी-ए-कश्मीर अपने चिनार के पेड़ों, कश्मीरी सेब, केसर पश्मीना ऊन और शॉलों पर की गयी कढ़ाई, गलीचों और देसी चाय के लिये दुनिया भर में मशहूर है| यहाँ का सन्तूर भी बहुत प्रसिद्ध है| कश्मीरी व्यंजन भारत भर में बहुत ही लज़ीज़ माने जाते हैं| नोट करें कि ज़्यादातर कश्मीरी पण्डित मांस खाते हैं| कश्मीरी पण्डितों के मांसाहारी व्यंजन हैं| नेनी क़लिया, नेनी रोग़न जोश, नेनी यख़ियन, मच्छ, है|

कश्मीरी पण्डितों के शाकाहारी व्यंजन हैं| चमनी क़लिया, वेथ चमन, दम ओलुव, राज़्मा गोआग्जी, चोएक वंगन, इत्यादि| कश्मीरी मुसल्मानों के मांसाहारी व्यंजन हैं| कई तरह के कबाब और कोफ़्ते, रिश्ताबा, गोश्ताबा, इत्यादि| परम्परागत कश्मीरी दावत को वाज़वान कहा जाता है| कुल मिलाकर कहा जाये तो कश्मीर हिन्दू और मुस्लिम संस्कृतियों का अनूठा मिश्रण है| इसलिये काश्मीर मुझे बहुत पसंद है|

Mera Priya Paryatan sthal essay in Hindi language. आपको ये निबंध कैसे लगाये हमे कमेंट करके जरूर बताये|

Share on:

इस ब्लॉग पर आपको निबंध, भाषण, अनमोल विचार, कहानी पढ़ने के लिए मिलेगी |अगर आपको भी कोई जानकारी लिखनी है तो आप हमारे ब्लॉग पर लिख सकते हो |

Leave a Comment