संयुक्त परिवार के गुण दोष हिंदी निबंध Merits and Demerits of joint family Essay in Hindi

संयुक्त परिवार के गुण दोष हिंदी निबंध Merits and Demerits of joint family Essay in Hindi: हमारे समाज में परिवार के मुख्य दो रूप हैं : एक संयुक्त परिवार और दूसरा विभक्त परिवार । संयुक्त परिवार में दादा-दादी, माता-पिता, पुत्र-पौत्र, चाचा-चाची आदि अनेक कुटुंबीजन एकसाथ रहते हैं। परिवार की जायदाद, आमदनी आदि की व्यवस्था परिवार का सबसे बड़ा व्यक्ति (मुखिया) करता है।

संयुक्त परिवार के गुण दोष हिंदी निबंध Merits and Demerits of joint family Essay in Hindi

संयुक्त परिवार के गुण दोष हिंदी निबंध Merits and Demerits of joint family Essay in Hindi

अनेक लाभ

एक साथ रहने के कारण परिवार के सदस्यों में परस्पर स्नेह बढ़ता है। उनमें सहयोग की भावना का विकास होता है । संयुक्त परिवार में एक ही चूल्हे से काम चल सकता है और थोड़े खर्च में भी सबका गुजारा हो जाता है। विधवा, बूढ़े, अपाहिज आदि को अकेले रहने में बड़ी तकलीफ होती है, लेकिन संयुक्त परिवार में वे सुखपूर्वक रह सकते हैं। विवाह, प्रीतिभोज, सालगिरह, सफर आदि में जो उल्लास और उत्साह संयुक्त परिवार में दिखाई पड़ता है, वह विभक्त परिवार में दुर्लभ है। संयुक्त परिवार के सदस्य को किसी दुर्घटना, बीमारी आदि में परिवार के सदस्यों की विशेष रूप से सहायता प्राप्त होती है।

कुछ दोष

संयुक्त परिवार के कुछ दोष भी है । संयुक्त परिवार में कई बार झगड़ों की जहरीली हवा फैल जाती है। भिन्न-भिन्न विचार, आदर्श और स्वभाव के व्यक्तियों के बीच संघर्ष होता रहता है। पिता-पुत्र में अनबन हो जाती है। भाई भाई के संबंध टूट जाते हैं । देवरानी जेठानी और सास-बहू में महाभारत छिड़ जाता है। यहाँ तक कि कभी-कभी तो पारिवारिक झगड़ों के कारण पति-पत्नी के मधुर जीवन में भी कटुता आ जाती है। संयुक्त परिवार में कमानेवाले व्यक्तियों की आमदनी एक-सी न भी हो, लेकिन खर्च तो सबके लिए समान होता है। इससे कमानेवाले व्यक्ति पर अधिक बोझ पड़ता है और दूसरे आराम से रहते हैं। सदा बड़ों के अधिक प्रभाव के कारण युवकों की साहसवृत्ति और सुधारदृष्टि का भी विकास नहीं हो पाता।

संयुक्त परिवारों का टूटना

भारत में संयुक्त परिवार की प्रथा धीरे-धीरे नष्ट हो रही है। मुंबई, कलकत्ता, दिल्ली, अहमदाबाद जैसे बड़े-बड़े शहरों में जगह की कमी होती है । इससे संयुक्त परिवार अपने आप टूटते जा रहे हैं। अलग-अलग व्यवसाय के कारण भी संयुक्त परिवार छिन्न-भिन्न होते जा रहे हैं। अंग्रेजी शिक्षा और पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर आज कुछ लोग अपनी खिचड़ी अलग पकाना ही अधिक पसंद करते हैं।

उपसंहार

वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए संयुक्त परिवार का समर्थन या खंडन करना आसान नहीं है। फिर भी जो लोग अब भी संयुक्त परिवार में रहते हैं, उन्हें चाहिए कि वे थोड़ा बहुत सहन करके भी संयुक्त परिवार की मिठास का अनुभव करते रहें।

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