जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी हिंदी निबंध My Motherland Essay in Hindi

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी हिंदी निबंध My Motherland Essay in Hindi: जननी का अर्थ है जन्म देनेवाली माता और जन्मभूमि का अर्थ है वह देश जहाँ व्यक्ति का जन्म हुआ है। इस दृष्टि से जननी और जन्मभूमि दोनों हमारे लिए परम वंदनीय हैं । उनको महिमा के आगे स्वर्ग भी झुकता है।

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी हिंदी निबंध My Motherland Essay in Hindi

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी हिंदी निबंध My Motherland Essay in Hindi

जननी के उपकार

जननी से ही हमें यह मूल्यवान जीवन मिलता है । वही हमारा लालन-पालन करती है। उसकी वात्सल्य-सुधा पोकर हम बड़े होते हैं। माता को बालक का प्रथम गुरु होने का गौरव प्राप्त है। वह माँ ही तो है, जो पुत्र में अच्छे सुसंस्कारों का सिंचन करती है। वह अपनी अच्छी शिक्षाओं से बालक को जीवन के श्रेष्ठ मूल्यों से परिचित कराती है । मानवता और नागरिकता के आरंभिक पाठ हम माँ से ही सीखते हैं। माँ ही जीजाबाई के रूप में देशोद्धार के लिए छत्रपति शिवाजी को तैयार करती है। सीता माता के संरक्षण और निरीक्षण में ही विश्वविजयी श्रीराम की सेना को परास्त करनेवाले लव और कुश धनुर्विद्या सीखते हैं। पुतलोवाई के उच्च धार्मिक संस्कारों ने ही पुत्र मोहनदास को महात्मा गांधी के रूप में भारतीय स्वतंत्रता-संघर्ष का वीर नायक बना दिया था । अपनी माता से प्रेरणा पाकर ही राईट बंधुओं ने प्रथम हवाई जहाज बनाने और उड़ाने का श्रेय प्राप्त किया था। इसलिए कहा गया है कि माँ के ऋण से पुत्र कभी भी उत्रण नहीं हो सकता।

जन्मभूमि की महिमा

ऐसी ही अपार महिमा जन्मभूमि की भी है। अपनी भूमि, जन और संस्कृति से सबको स्वाभाविक लगाव होता है। जन्मभूमि के मिट्टी तथा जल से हमारे शरीर का निर्माण होता है । उसके अन्न से हमारा पोषण होता है। जन्मभूमि के वृक्षों से हमें मधुर फल प्राप्त होते हैं। उसकी नदियाँ हमें शीतल-मधुर जल प्रदान करती हैं। उसके ऊँचे-ऊँचे पर्वत हमारी रक्षा करते हैं। जन्मभूमि के समाज में हमारा विकास होता है । उसीकी धूल मिट्टी में खेल खेलकर हम धूलभरे होरे’ कहलाते हैं। उसीके आँचल में हम सभी तरह के सुख पाते हैं और अपने अरमान पूरे करते हैं।

स्वर्ग देवताओं का लोक है। वह केवल सुखभोग को धरती है। मानवीय संबंधों की मिठास वहाँ दुर्लभ है। वहाँ न कलकल बहती नदियाँ हैं, न झरने हैं, न हरियाली है। प्रतिदिन नए-नए तरोताजा फूल स्वर्ग में नहीं खिलते। वहाँ न कोयल की कूक है, न मोर का केकारव है। स्वाभिमान और स्वावलंबन की झलक के दर्शन स्वर्ग में नहीं हो सकते।

स्वर्गलोक की वास्तविकता

सचमुच, जननी और जन्मभूमि जैसा अपनापन स्वर्ग लोक में भी नहीं मिल सकता। वहाँ हृदय को छूनेवाली भावनाओं और संवेदनाओं के लिए कोई स्थान नहीं है । हृदय के वैभव के दर्शन तो जननी और जन्मभूमि ही करा सकती हैं। इसीलिए भगवान श्रीराम कहते हैं।

‘संदेश यहाँ मैं नहीं स्वर्ग का लाया
इस भूतल को ही स्वर्ग बनाने आया।”

उपसंहार

श्रीराम के ये शब्द स्वर्ग की तुलना में जननी और जन्मभूमि My Motherland  को श्रेष्ठता सिद्ध करते हैं।

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