हमारा नौकर हिंदी निबंध Our Servant Essay in Hindi

Our Servant Essay in Hindi: यो तो गोपाल हमारे घर का नौकर है, पर उसे हम अपने घर का एक सदस्य ही समझते हैं। पिछले बीस सालों से वह हमारे साथ रहता है और जी-जान से हमारी सेवा करता है । आज उसको उम्र लगभग चालीस वर्ष की होगी, पर वह एक युवक के समान ताकतवर और फुर्तीला है।

हमारा नौकर हिंदी निबंध - Our Servant Essay in Hindi

हमारा नौकर हिंदी निबंध Our Servant Essay in Hindi

कार्य

गोपाल बड़े सबेरे उठकर पानी भरता है और हमारे लिए चाय बनाता है । फिर वह बाजार से सागभाजी और समाचारपत्र खरीद लाता है। दोपहर को वह हमारे साथ ही भोजन करने बैठता है। वह हमारे घर की देखभाल करता है। घर की सफाई और सजावट की जिम्मेदारी उसी पर है। वह मेरे छोटे भाई-बहनों को पाठशाला पहुँचाता है और शाम को उन्हें घर ले आता है। कपड़ों को लोहा करना, बाजार से चीज-वस्तुएँ खरीद लाना, उसका हिसाब रखना आदि घर के कई काम गोपाल ही करता है।

गुण

गोपाल बड़ा मेहनती है । वह अपने सभी काम पूरी ईमानदारी से करता है। वह बोलता कम है, पर काम ज्यादा करता है। वह पढ़ा तो कम है, परंतु उसमें व्यावहारिक ज्ञान अधिक है। हमारे परिवार के बच्चों को खिलाने और उनके साथ खेलने में उसे विशेष आनंद मिलता है। मेरी छोटी बहन सोनल के लिए उसके दिल में अपार स्नेह है। वह उसकी कोई भी बात खाली नहीं जाने देता। घर में कोई न हो तब भी वह हमारे सगे-संबंधियों और मित्रों का आदर-सत्कार करता है।

हमारे परिवार का कोई भी काम ऐसा नहीं, जिसके लिए हम गोपाल की ओर विश्वास की निगाहों से न देखते हों। चाहे घर में बच्चों को सँभालना हो, चाहे दुकान का काम हो, चाहे खरीद-विक्री हो, चाहे बैंक से रुपए लाना हो, गोपालराम सदा तैयार । वह कभी खाने पीने के बारे में शिकायत नहीं करता, वक्त बेवक्त हो जाए सी भी परवाह नहीं। दिन हो या रात, सर्दी हो या गर्मी, गोपाल ‘ना’ कहना नहीं जानता। गोपाल को भजन गाने का शौक भी है।

कुछ दोष

गोपाल में कुछ दोष भी हैं, जैसे थोडा-बहुत पढ़ने की उसकी बड़ी इच्छा है, किंतु जब हम किताब लाकर उसे पढ़ाने की कोशिश करते हैं, तब वह पढ़ाई में ज्यादा रुचि नहीं लेता। हमारे घर और कपड़ों को स्वच्छता पर उसका पूरा ध्यान रहता है, पर अपनी स्वच्छता के प्रति वह थोड़ा-सा लापरवाह रहता है। पान का वह बेहद शौकीन है। बीड़ी पीने की भी उसकी आदत है। किंतु इन दोषों का कारण उसकी अशिक्षा और उसके पुराने संस्कार हैं, जिनसे मुक्त होना अब उसके लिए बहुत कठिन है।

उपसंहार

गोपाल और हमारे बीच सदा सहानुभूति और स्नेह की भावनाएँ बनी रही हैं। उसकी सेवा, सादगी और स्नेह की भावना ने हम सबके दिलों को इस तरह जीत लिया है कि अब हमारे लिए उसे अपने परिवार से अलग करना असंभव है।

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