जनसंख्या वृद्धि की समस्या हिंदी निबंध Population Problem Essay in Hindi

जनसंख्या वृद्धि की समस्या हिंदी निबंध Population Problem Essay in Hindi: भारत को ‘स्वराज’ मिले तो आधी सदी बीत गई, पर ‘सुराज’ अब तक नहीं मिला। नौ पंचवर्षीय योजनाएँ अमल में आ गई, पर देश को गिनती आज भी दुनिया के पिछड़े हुए देशों में हो होती है । इसका सबसे बड़ा कारण है-देश की लगातार बढ़ती हुई जनसंख्या । जनसंख्या में हो रही यह वृद्धि ही देश की सारी समस्याओं की जड़ है।

जनसंख्या वृद्धि की समस्या हिंदी निबंध Population Problem Essay in Hindi

जनसंख्या वृद्धि की समस्या हिंदी निबंध Population Problem Essay in Hindi

जनसंख्या वृद्धि के परिणाम

जनसंख्यावृद्धि ने देश के विकास को पंगु बना दिया है। विज्ञान के विकास के जो लाभ मिले, वे आबादी की बाढ़ में बह गए । स्वतंत्रता के बाद देश में बड़ी बड़ी नदियों पर विशाल बाँध बने । सिंचाई की सुविधा से देश में हरित क्रांति हुई। अनाज का उत्पादन बढ़ा । फिर भी यहाँ सबको भरपेट अन्न नहीं मिल पाता । हमारे बाजार कपड़ों से भरे पड़े हैं, पर सबको शरीर ढंकने के लिए कपड़ा नहीं मिलता। शहरों में मकानों की अपेक्षा झोपड़ियाँ अधिक हो गई हैं। सड़कों पर चलने के लिए जगह नहीं मिलती। रेलगाड़ियों और बसों में लोग खिड़कियों पर लटककर यात्रा करते हैं और दुर्घटनाओं के शिकार होते हैं। जंगल नष्ट हो रहे हैं। गर्मियों में पेय जल का भीषण संकट खड़ा हो जाता है। चोरी, गुंडागौरी, तस्करी आदि असामाजिक प्रवृत्तियों का एक प्रमुख कारण जनसंख्यावृद्धि ही है।

कारण

हमारे देश में जनसंख्या के विस्फोट के कई कारण हैं । विज्ञान ने यदि हमें विनाश के साधन दिए हैं, तो जीवनरक्षक औषधियाँ भी दी है। महामारियों और संक्रामण रोगों का अब पहले जैसा प्रकोप नहीं रहा है। अधिकांश रोगों पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया है। जीवन की सुविधाएँ भी बढ़ी हैं और स्वास्थ्य तथा वातावरण के प्रति लोगों में जागरूकता भी आई है। आयुसीमा बढ़ने तथा मृत्युदर में कमी आने से आबादी की वृद्धि को प्रोत्साहन मिला है।

नियंत्रण जरूरी

जनसंख्या पर नियंत्रण करना आज समय की सबसे बड़ी माँग है। ऐसे तो मालथूजियन थियरी के अनुसार प्रकृति स्वयं जनसंख्या का संतुलन करती है। युद्ध, दंगे, बीमारियाँ, बाढ़, भूकंप आदि के द्वारा वह बढ़ी हुई आबादी को कम कर देती है। फिर भी देशवासियों का कर्तव्य है कि जनसंख्या को बेकाबू न होने दें। उसके लिए परिवार नियोजन के आदर्श को अपनाएँ । शादियाँ निर्धारित उम्र या उनके पश्चात ही होनी चाहिए। देश में सुख, शांति और प्रगति के लिए जनसंख्या का सीमित रहना जरूरी है। पश्चिमी देशों की प्रगति का रहस्य वहाँ जनसंख्या का कम होना है।

संदेश

उत्पादन और जनसंख्या में सुसंगति रखकर ही हम बुद्धिमान और दूरदर्शी होने का दावा कर सकते हैं।

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