Pruthvi Ki Atmakatha essay in Hindi language | पृथ्वी की आत्मकथा निबंध

Pruthvi Ki Atmakatha essay in Hindi language मै पृथ्वी बोल रही हूं| मै एक मात्र ऐसा ग्रह जिस पर जीवन बसा हुआ है| मैं अकेली ऐसे ग्रह हूं जिस पर जीवन की कामना कि जा सकता है| मेरे भूभाग पर मानव और जीव जंतु निवास करते हैं और वह मुझे माता का दर्जा देते हैं| मुझे सब पृथ्वी माता केहते है| मै भी सभी मनुष्यों को जीव जंतुओं को पुत्र के समान प्रेम करती हूं और उनका भरण पोषण करती हूं| मैं अपने सभी पुत्रों को देखकर खुश रहती हूं और वो हमेशा खूश रहे ऐसी कामना करती हूं|

किसान मेरे भूभाग पर शेती करते है और जगत का पालन पोषण करते है| मै भी उनको ढेर सारा उत्पन्न के रूप मे धान्य देती हू| पेड़ पौधे लगाते हैं| ये देख कर मुझे बहुत खुशी मिलती है| मै हमेशा हरी भरी नजर आती हूं| मेरा हरा भरा रहना ही मेरी पहचान है| किसान अपने पेट की भूख को शांत करने के लिए फल, सब्जियां, अनाज, आदि उगाते हैं| इस प्रकार से मै उनका भरण पोषण करती हूं|

करोड़ों प्रकार के प्रजाति और जीव जंतु मेरी सतह पर मिलजुल कर रहते हैं और मेरा आदर और सम्मान करते हैं| मुझे जननी के रूप में देखते हैं| दो प्रकार के मेरे पुत्र जो मेरे भूभाग पर रहते हैं| किसान जो अनाज बो कर सभी की भूख शांत करता है और दूसरा सेना के वीर जवान जो बंदूक लिए सभी की रक्षा करते हैं| ये दोनों प्रकार के पुत्र के अलावा भी काफी सारे मेरे पुत्र हैं| जो मुझसे अनंत प्रेम करते हैं और मै भी सभी को अपने पुत्र के समान मानती हूं|

जब पृथ्वी माता को क्रोध आता है तो सभी जीव जंतुओं को और उनके पुत्रों को झेलना होता है| जब धरती माता थोड़ा सा भी हिलती है| या जब हल्की सी भी हलचल होती है| तो सभी मानव जीवन और जीव-जंतुओं पर संकट के बादल मंडराने लगते हैं| पृथ्वी माता के हिलने पर ही भूकम्प और सुनामी जैसी त्रासदी का आना स्वाभाविक हो जाता है और जब ये त्रासदी आती है तो ये केवल विनाशकारी ही साबित होती है| संपत्तियों का नुक़सान, मानव जीवन का खात्मा, और भी कई सारी तबाही होती है|

इसलिए मै हमेशा स्थिर रहने की कोशिश करती हूं| पर मुझ पर अत्याचार कर रहे लोगो की वजह से मुझे क्रोध आ जाता है और मेरा संतुलन बिगड़ जाता है| इसलिए मै हमेशा हर किसी को केवल एक संदेश देती हूं कि मुझे और मेरी बनाई हर चीज से प्रेम करो और आपका जीवन अपने आप खुशहाल बनेगा| अपनी माता को इस प्रकार कष्ट देना अच्छी बात नहीं है| उनकी बनाई हुई अनमोल चीजों से प्रेम करना सीखो|

इसीलिए मै सभी को एक निवेदन करना चाहती हूँ की, आप सब मेरा खयाल रखे| ताकि मेरे धरतीपुत्र को नुकसान ना पोहोचे और एक बात, मेरे पेड पोधे को न काटो, ताकी मेरा वातावरण बना रहे| पेड पोधो से ही मेरा वातावरण शुद्ध रहता है| ऑक्सिजन की भरपूर मात्रा मे उपलब्धी होती है इसलिए आप सब मेरा खयाल रखे| ता कि मै आप सब का खयाल रख सकू|

पृथ्वी की आत्मकथा निबंध कैसा लगा कमेंट करके बताये | Pruthvi Ki Atmakatha essay in Hindi language.

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