Ruddhapan samasya essay in Hindi language | वृद्धापन समस्या हिंदी निबंध

Ruddhapan samasya essay in Hindi language हर किसी के जीवन मे बुढापा याने की वृद्धपण आता है| चाहे ओ पशुपक्षी हो या इन्सान हो| बुढापा  जीवन की उस अवस्था को कहते हैं जिसमें उम्र मानव जीवन की औसत काल के समीप या उससे अधिक हो जाती है| वृद्ध लोगों को रोग लगने की अधिक सम्भावना होती है| उनकी समस्याएं भी अलग होती हैं| वृद्धावस्था एक धीरे-धीरे आने वाली अवस्था है जो कि स्वभाविक व प्राकृतिक घटना है| वृद्ध का शाब्दिक अर्थ है बढ़ा हुआ, पका हुआ, परिपक्व|

वृद्धावस्था को जीवन का अंतिम पड़ाव एवं समस्या से घिरी हुर्इ अवस्था माना जाता है क्योंकि इस अवस्था में वृद्धों को अनेक समस्याएं घेर लेती है, जिसके परिणाम स्वरूप दूसरों के साथ संबंध स्थापित करने में असमर्थ रहते है| समय की रफतार के साथ-साथ समाज में नये नये परिवर्तन होने लगे हैं| नर्इ पीढ़ी के लोग पुराने विचारों के लोगों को अपने जीवन में आने को उपयुक्त नही समझते है| इस कारण युवा पीढ़ी उनके अनुभवों एवं विचारों की उपेक्षा करते है| वद्धों की समस्याओं एवं उनकी उपयोगिता भी समाज में कम होती नजर आने लगी है, जैसे कि,

वृद्धावस्था उतरते या ढलते काल है| इस अवस्था में शरीर शिथिल होने लगते है| वृद्धावस्था में शरीर में बदलाव का परिणाम सामाजिक बदलाव पर होता है| इस अवस्था में अनेक समस्याएं निर्मित होती है| कोर्इ व्यकित 60 साल में भी जवान दिखार्इ देता है तो कोर्इ 40 साल में ही वृद्ध दिखने लगता है| वृद्धावस्था में व्यकित के शरीर में झुर्रिया, चिड़चिड़ापन जैसे अनेक लक्षण दिखार्इ देने लगते है|

शारीरिक बदलाव के अनुसार मानसिक परिवर्तन भी होता है| सर्व विदित है कि यदि पति या पत्नी में से किसी एक की मृत्यु हो जाने से हीन भावना की वृिद्ध होती है तथा आत्मविश्वास का अभाव दिखने लगता है जिससे मानसिक विकृत, अकेलापन आदि जैसे दोष निर्माण होते है| अत: समाज को अपना कुछ भी उपयोग नहीं होने से निरूपयोगिता की भावना का जन्म होने लगता है|

शारीरिक बदलाव के अनुसार मानसिक परिवर्तन भी होता है| इस अवस्था के प्रवेश करते ही स्वास्थ्य की समस्या बनने लगती है तथा लोगों से संपर्क बनाना सहयोगी या मित्रों के निधन हो जाने से स्वास्थ्य की समस्या एक महत्वपूर्ण कारण है|

आर्थिक समस्या वृद्धों की महत्वपूर्ण समस्या है| वृद्धों को आर्थिक समस्या का अभाव ज्ञात होने लगता है| कार्य क्षमता की कमी होती है जिससे दूसरों पर निर्भरता बढने लगती है और युवाओं द्वारा या परिवार के सदस्यों द्वारा उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता हैं| सर्व विदित है कि इस अवस्था में शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण वे समूह एवं परिवार से अलग होने लगते है जिसके कारण सामाजिक व पारिवारिक संबंधों में बुरा असर होने लगता है|

परिवार से सामन्जस्य न कर पाना, अलगाव, पृथक्कीकरण की अनुभूति, युवा पढ़ी द्वारा वृद्ध के अनुभवों, विचारों, परामर्श को दुलक्षित करने के कारण उन्हे घर से अलग या वृद्धा आश्रमों में रखा जाना या घर से निकाल देने जैसी समस्याएं देखने को मिलती है, जिससे वृद्धों में अकेलापन की समस्या का निर्माण होता है| घर मे अनादर होता है और उसे जरा समाज मे भी उनका अनादर किया जाता है कौन से वो नाराज रहते है|

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