Sadak Ki Atmakatha essay in Hindi language | सडक की आत्मकथा हिंदी निबंध

Sadak Ki Atmakatha essay in Hindi language मैं हूँ सडक, मेरे मन मे जो बात है, तुम्हे बताने से मेरा मन हलका हो जाएगा| कई बस, कार इत्यादि वाहन मेरे ऊपर चलते है| सभी वाहन जब मेरे ऊपर चलते है, तो मैं उन्हें महसूस कर सकती हूँ| लोग सोचते है कि मुझ में कोई जीवन नहीं है| असलियत में मुझे मालूम पड़ता है जब लोग मेरे ऊपर चलते है| मैं हर व्यक्ति को उसके गंतव्य स्थान तक पहुंचाता हूँ| मैं सभी को दफ्तर, विद्यालय, घर इत्यादि जगहों पर ले जाने का जरिया हूँ| मुझे हर मनुष्यने अपने बचपन से देखा होगा| मैं हर दिन चौब्बिसो घंटे अपना काम करता हूँ| मुझे बहुत बुरा लगता है, जब लोग शिक्षित होकर भी मेरे ऊपर कूड़ा कचरा फेंक देते है|

जब लोग मेरा इस्तेमाल करते है और सुकून से अपने घर और कार्यस्थल पर पहुँच जाते है, तो मुझे बेहद ख़ुशी होती है| बच्चे कभी खुले खाली सड़क पर आकर खेलते है| उनकी किलकारियों से मुझे बेहद प्रसन्नता होती है| सड़क सिर्फ बस, कार, ट्रको के लिए ही नहीं, बल्कि हवाई जहाज शुरुआत में मेरे ऊपर चलकर ही उड़ान भरते है| मुझे बनाने के लिए लोग पहाड़ो के चट्टानों को काटते है, ताकि गाड़ियों और लोगो के आवाजाही के लिए सड़क बना सके|

मनुष्यो ने काफी उन्नति कर ली है| सड़को के लगातार निर्माण होने के संग वाहनों की संख्या अत्यधिक बढ़ गयी है| प्रदूषण भी काफी बढ़ गया है| मुझे बहुत दुःख होता है, जब अत्यधिक प्रदूषण के कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है| अधिक वाहनों के चलने की वजह से कभी मैं टूट जाता हूँ| दरारें पड़ जाती है| मरम्मत करने के लिए कई दफा सरकार को काफी वक़्त लग जाता है| इन्ही सब अवहेलनाओं की वजह से सड़को पर आये दिन कार और बसों की दुर्घटनाओं की खबर आती है, जिससे मुझे बेहद दुःख होता है|

लोगो को आजकल अपने गंतव्य स्थान तक पहुँचने के लिए बहुत जल्दी मची रहती है| इसी जल्दी की वजह से दुर्घटनाएं जन्म लेती है| मुझे बहुत दुःख होता है, जब सड़क दुर्घटनाओं में लोग अपनी जान गवा देते है| कई परिवारों को अपने सदस्य खोने पड़ते है| लोगो की यह जिम्मेदारी है कि वह ट्रैफिक नियमो का अनुकरण करे और सावधानी से गाड़ी चलाये| मेरे अनेको रूप है| कभी मैं पगडंडी बन जाता हूँ, तो कभी चौड़ा रास्ता| मैं सभी को एक दूसरे से मिलवाने का माध्यम हूँ| मेरे ऊपर हर तरह के प्राणी आसानी से चल सकते है| मनुष्यो की भाँती पशु पक्षी भी मेरे ऊपर चलते है और मेरा इस्तेमाल करते है|

सड़को पर बहुत सारी गाड़ियां चलती है| लोग सफर का आनंद लेते है और उन्ही में से कुछ गैर जिम्मेदार लोग हम सड़को को गन्दा करते है| वे प्लास्टिक के बोतल, चिप्स के पैकेट्स फेंक देते है| उन्हें इस बात का इल्म तक नहीं है कि वह खुद अपना नुकसान कर रहे है, गन्दगी को फैलाकर| कूड़े और ऐसी चीज़ें जो मिटटी में आसानी से नहीं मिल पाती है, उन्हें सड़को पर नहीं फेंकना चाहिए| सड़को पर पशुएं भी घूमते है| वह बेजुबान और भोले होते है और कई बार प्लास्टिक जैसी चीज़ो को निगल जाते है, जिससे उनकी मौत हो जाती है|

नागरिको को अपने जिम्मदारियों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और इन सब चीज़ो पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए| नागरिको को हम सड़को को सदैव साफ़ रखना चाहिए| देश के विकास की पहचान वहाँ के अच्छी और मजबूत सड़को से भी होती है| मैं प्रत्येक किलोमीटर दर किलोमीटर तक चलता हूँ| लोगो को मंज़िल तक मैं ले जाता हूँ| मैंने अपने जीवनकाल में कई मुसाफिरों से मुलाकातें की है|

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