Suraj ka mahatva essay in Hindi language | सुरज का महत्त्व निबंध

Suraj ka mahatva essay in Hindi language हिन्दू धर्म में सूरज को देवता का दर्ज़ा दिया जाता है| हिंदू धर्म मे सुरज को पूजा जाता है| हिंदू धर्म की पवित्र किताब वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है| सूर्य से ही इस पृथ्वीपर जीवन है, यह एक सर्वमान्य सत्य है| हिंदू समुदाय सूर्य को भगवान मानकर उनकी पूजा करते हैं और रोज सवेरे उन्हें जल अर्पण करते हैं।

भारत देश में सूर्य को सभी देवताओं में से सबसे श्रेष्ठ देवता माना जाता है और बहुत से जगह सूर्य मंदिर की भी स्थापना भी की गई है, जिसमें मोढेरा का सूर्य मंदिर, कोणार्क सूर्य मंदिर, मार्तंड सूर्य मंदिर, रणकपुर सूर्य मंदिर, औंगारी सूर्य मंदिर आदि कुछ प्राचीन मंदिरों में से एक है|

सुरज यह ग्रह पूरा का पूरा ज्वलनशील गैसों से बना एक धधकता हुआ आग का गोला है| सूर्य 72 प्रतिशत हाइड्रोजन से तथा 26 प्रतिशत हीलियम और 2 प्रतिशत कार्बन तथा अन्य ज्वलनशील गैसों से मिलकर बना है| सूरज इतना गर्म है| कि जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है| सूर्य पृथ्वी से इतना दूर है कि उसकी किरणों को पृथ्वी पर पहुँचनें में कुल 8 मिनट 17 सेकंड का समय लगता है|

सूर्य का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी से बहुत अधिक होने के कारण सभी ग्रह उसके चारों ओर अपनी निर्धारित कक्षा में परिक्रमा करते हैं| सूर्य इतना विशाल है कि उसके अंदर 13 लाख से भी अधिक पृथ्वीयाँ समा सकती हैं| सुरज का महत्व हमारे जीवन मे है| पृथ्वी पर हरेक जीवजंतू, पेड, पशू, पक्षी सभी को सुरज की आवश्यकता है| पूरे ब्रह्मांड में केवल पृथ्वी ही ऐसी ग्रह है| जिस पर जीवन संभव हो पाया है, जिसमें सूर्य का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है| सूर्य दिखने में गोल है लेकिन इसका व्यास 13 लाख 92 हजार किलोमीटर है| सूरज धरती से लगभग 110 गुना विशाल है, पृथ्वी से 150 मिलियन किलोमीटर दूर होने के बावजूद भी यह हमें रोशनी देता है|

संसार में प्रकाश का स्त्रोत सूर्य ही है यदि सूर्य ना होता तो पृथ्वी भी सभी ग्रहों की तरह बेजान होती| धरती पर आने वाले सभी जीव-जंतु प्रकृति पर निर्भर है किंतु प्रकृति का वजूद खुद सूरज पर निर्भर है| अगर सूरज की किरणें धरती पर न पहुँचे तो धरती का विनाश हो जाएगा, चारों ओर अंधकार छा जाएगा, धरती पर मौजूद बड़े-बड़े सागर महासागर वाष्प बनकर उड़ जाएंगे| पृथ्वी पर भयानक प्रलय छा जाएगा और पृथ्वी पर से जीवन का नामोनिशान ही मिट जाएगा|

पृथ्वी सूर्य के चारों ओर 24 घंटे में एक चक्कर लगाती है| और इसी चक्र के चलने से ऋतुओं का निर्माण होता है| आज के समय में इंसान सौर उर्जा को ऊष्मा उर्जा में रूपांतरित कर जरुरी लाभ प्राप्त कर रहा है, जैसे की सोलर एनेर्जी से विद्युत प्राप्त करना| सूर्य की तेज किरणों से बचाव के लिए प्रकृति द्वारा कई परतें बनी हुई है जिन्हें ओजोन स्तर कहा जाता है और बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग के कारण ओजोन स्तर का नाश हो रहा है| अगर इसी तेजी से ओजोन का विनाश जारी रहा तो सूर्य की किरणे सीधे पृथ्वी पर पड़ेंगी और अगर ऐसा हुआ तो वरदान साबित हो रही सूर्य की किरणे विनाश का कारण बनेंगी|

आज के दूषित वातावरण के कारण सूर्य की तरफ सीधे देखने भर से आंखों की रोशनी कम होने लगती हैं| सूर्य की तेज किरणों के कारण बर्फीले ग्लेशियर पिघलने लगते हैं और उनके पिघलने से समुद्रों में जल की अस्थिरता भी देखने को मिलती है जिसके परिणाम के रूप में बाढ़ और सुनामी का विकराल रूप देखने को मिलता है|

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