Swatantrata Sangram Mein Nari ka yohdan essay in Hindi language | स्वतंत्रता संग्राम में नारी का योगदान निबंध

Swatantrata Sangram Mein Nari ka yohdan essay in Hindi language नारी को हमारे देश में आदिशक्ती का रूप मानते है| नारी विद्या है, नारी लक्ष्मी है, नारी शक्ती है, नारी वह सनातन शक्ति है जो अनादि काल से उन सामाजिक दायित्वों का वहन करती आ रही हैं, जिन्हें पुरुषों का कंधा सम्भाल नहीं पाता| माता पिता के रूप में नारी ममता, करुणा, वात्सल्य, सह्रदयता जैसे सद्गुणों से यूक्त हो|

किसी भी राष्ट्र के निर्माण में उस राष्ट्र की आधी आबादी की भूमिका की महत्ता से इनकार नही किया जा सकता हैं| आधी आबादी यदि किसी भी कारण से निष्क्रिय रहती हैं| तो उस राष्ट्र या समाज की समुचित और उल्लेखनीय प्रगति के बारे में कल्पना भी नहीं की जा सकती हैं|

भारत यह देश स्वतंत्रता पूर्व पारतंत्र मे था| यहा इंग्रज अँग्रेजो की हुकूमत चलती थी| लेकीन हमारे देश के स्वतंत्रता पर विचार करणे वाले थोर विचारवंत और उनके साथ मे महिला रोका भी योगदान रहा है| राष्ट्र के नव निर्माण में महिलाओं का योगदान कहा है हमे इतिहास बताता है| वे अपनी योग्यता और साहस के बल पर पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर ही नही, बल्कि एक कदम आगे चल रही है|

महिलाओंने भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल आदि का दायित्व बड़ी कुशलता से संभाला है और संभाल रही है| इनके अलावा ये प्रशासनिक सेवा पद, विज्ञान, शिक्षा अनुसंधान, सेना, अंतरिक्ष, व्यापार, खेल, चिकित्सा आदि सभी क्षेत्रों में अपना अविस्मर्णीय योगदान दे रही है|  राष्ट्र अपने नव निर्माण में इनके योगदान से गौरवान्वित अनुभव कर रहा है| अंग्रेजों के विरुद्ध इस लड़ाई में पुरुषों के साथ महिलाओं के सक्रिय योगदान की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही|

प्रथम स्वाधीनता संग्राम 1857 में पुरुषों की संघर्षशील भूमिका के मध्य, महारानी लक्ष्मी बाई, झलकारी बाई, बेगम हजरत महल, रानी चेन्नमा आदि वीरांगनाओं के साहस और सक्रिय योगदान को कभी भुलाया नही जा सकता| ब्रिटिश सता की स्वार्थी, कपटपूर्ण नीतियों, जनता को सताने, दबाने एवं अन्यायपूर्ण शोषण करने की कुचालों से भारतीय जनमानस में विद्रोह उभरने लगा|

1857 की क्रांति के बाद हिंदुस्‍तान की धरती पर हो रहे परिवर्तनों ने जहाँ एक ओर नवजागरण की जमीन तैयार की, वहीं विभिन्‍न सुधार आंदोलनों और आधुनिक मूल्‍यों और रौशनी में रूढिवादी मूल्‍य टूट रहे थे, हिंदू समाज के बंधन ढीले पड़ रहे थे और स्त्रियों की दुनिया चूल्‍हे-चौके से बाहर नए आकाश में विस्‍तार पा रही थी।

इतिहास साक्षी है कि एक कट्टर रूढिवादी हिंदू समाज में इसके पहले इतने बड़े पैमाने पर महिलाएँ सड़कों पर नहीं उतरी थीं| पूरी दुनिया के इतिहास में ऐसे उदाहरण कम ही मिलते हैं| गाँधी ने कहा था कि हमारी माँओं-बहनों के सहयोग के बगैर यह संघर्ष संभव ही नहीं था| जिन महिलाओं ने आजादी की लड़ाई को अपने साहस से धार दी, उनका जिक्र यहाँ लाजिमी है| वीर शिवाजी की स्वराज्य स्थापना के पीछे उनकी वीर माता जीजाबाई का जैसा हाथ था, उसी प्रकार स्वतंत्रता संग्राम के पीछे महिलाओं के योगदान और प्रेरणा रहीं|

महिलाओंने आंदोलन में भाग लेने वालों, जेल जाने वालों, फांसी के फंदों पर झूलने वालों को तिलक लगाकर और राखी बांधकर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की साहसिक प्रेरणा प्रदान की व अंग्रेजों के खिलाफ होने वाले आंदोलनों में कंधे से कंधा मिलाकर उनमें प्रेरणात्मक जोश का योगदान के रूप में जागरण किया|

Swatantrata Sangram Me Nari ka yogdan essay in Hindi language
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