Swavalamban essay in Hindi language | स्वावलंबनपर हिंदी निबंध

Swavalamban essay in Hindi language स्वावलम्बन से ही मनुष्य की प्रगति हो सकती है| जो व्यक्ती आलसी होता है, उसके जीवन में कभी सुख नही होता| स्वावलम्बी व्यक्ति ही अपना और अपने परिवार का भरन पोषण करने में सक्षम होता हैं| हरिवंश राय बच्चनने स्वावलम्बन के महत्व के बारे में बताते हुए लिखा हैं| “पश्चिम की हैं एक कहावत उसको धोखो उसको धोखो राम सहायक उनके होते जो होते हैं आप सहायक” कहने का अर्थ यह हैं कि ईश्वर भी उन्ही की सहायता करता हैं, जो खुद की सहायता के लिए तैयार हैं| बैसाखी के सहारे चलने वाले व्यक्ति की यदि बैसाखी छिन ली जाए तो वह चलने में असमर्थ हो जाता हैं| ठीक यही स्थिति दूसरों के सहारे जीने वाले लोगों की भी होती हैं| मनुष्य को जीवन भर संघर्ष करना पड़ता हैं|

इन संघर्षों में उसे समाज का अपेक्षित सहयोग भी मिलता हैं, किन्तु सहयोग अधिक मिलने लगे तो वह दूसरों पर निर्भर रहने का आदि हो जाता है| दूसरों पर उसकी निर्भरता परतन्त्रता का भी कारण बनती हैं| स्वावलंबन का अर्थ है अपने बलबूते पर कार्य करने वाला व्यक्ति| स्वावलंबन ही तो सफलता की कुंजी है| स्वावलंबी व्यक्ति जीवन में कीर्ति तथा वैभव दोनों ही अर्जित करता है| दूसरों के सहारे जीने वाला व्यक्ति सदा ही तिरस्कार का पात्र बनता है| निरंतर निरादर तथा तिरस्कार पाने के कारण उसमें हीन भावना घर कर लेती है| जीवन का यह सच केवल व्यक्ति विशेष पर ही नहीं, अपितु हर जाति, हर राष्ट्र, हर धर्म पर लागू होता है|

एक स्वतंत्र व स्वावलम्बी व्यक्ति ही मुक्तभाव से सोच-विचार कर के उचित कदम उठा सकता है| उसके द्वारा किए गए परिश्रम से बहने वाले पसीने की प्रत्येक बूंद मोती के समान बहुमूल्य होती है| स्वावलम्बन हमारी जीवन-नौका की पतवार है| यह ही हमारा पथ-प्रदर्शक है| इस कारण से मानव-जीवन में इसकी अत्यन्त महत्ता है| विश्व के इतिहास में अनेकों ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं जिन्होंने स्वावलम्बन से ही जीवन की ऊँचाइयों को छुआ था| अब्राहम लिंकन स्वावलम्बन से ही अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे| मैक्डानल एक अमिक से इंग्लैण्ड के प्रधानमंत्री बने थे| फोर्ड इसी के बल पर विश्व के सबसे धनी व्यक्ति बने थे|

भारतीय इतिहास में भी शकराचार्य, ईश्वरचन्द्र विद्यासागर, स्वामी रामतीर्थ, राष्ट्रपिता गाँधीजी, एकलव्य, लाल बहादुर शास्त्री आदि महापुरुषों के स्वावलम्बन-शक्ति के उदाहरण भरे पड़े| अनुचित लाड़-प्यार, मायामोह, आलस्य, भाग्यवाद, अन्धविश्वास आदि स्वावलम्बन में बाधाएँ उत्पन्न करते हैं| इनके अतिरिक्त बच्चों को हतोत्साहित करना या उन पर अंकुश लगाना भी उनके विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं| वास्तव में ये सभी स्वावलम्बन के शत्रु हैं| अतः इनसे दूर रहना ही हितकर है| स्वावलम्बन की महिमा अपरम्पार है| परिश्रमी को सदा ही सुखद फल की प्राप्ति हुई है|

आज का व्यक्ति अधिक-से-अधिक धन तथा सुख प्राप्त करना तो चाहता है| पर वह दूसरों को लूट-खसोट कर प्राप्त करना चाहता है अपने परिश्रम और स्वयं पर विश्वास व निष्ठा रखकर नहीं| इसीलिए वह स्वतंत्र होकर भी परतंत्र और दु:खी है| इस स्थिति से छुटकारा पाने का एक ही उपाय है और वह है स्वावलम्बी एवं आत्मनिर्भर बनना|

Swavalamban essay in Hindi language. स्वावलंबनपर हिंदी निबंध आपको कैसा लगा ये हमे कमेंट करके जरूर बताये|

Share on:

इस ब्लॉग पर आपको निबंध, भाषण, अनमोल विचार, कहानी पढ़ने के लिए मिलेगी |अगर आपको भी कोई जानकारी लिखनी है तो आप हमारे ब्लॉग पर लिख सकते हो |

Leave a Comment