Yog ki badhti lokpriyata essay in Hindi language | योग की बढती लोकप्रियता निबंध

Yog ki badhti lokpriyata essay in Hindi language प्रत्येक व्यक्ति स्वस्थ, सुखी रहे, इसी संकल्प को दोहराते हुए विश्व आयुर्वेद मिशन की ओर से राष्ट्रीय तरंग संगोष्टि में आयुर्वेंद विशेषज्ञों और आयुष मंत्रालय के अधिकारियों ने योग की महत्ता बताई| उन्होंने कहा कि निरोगी काया के लिए योग जरूरी है| कोरोना काल में योग की उपयोगिता और लोकप्रियता सिद्ध हो चुकी है| संक्रमितों के साथ संक्रमणमुक्त हो चुके लोगों के लिए प्रणायाम संजीवनी साबित हुआ है|

21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया गया| इस दिन करोड़ों लोगों ने विश्व में योग किया जो कि एक रिकॉर्ड था| योग व्यायाम का ऐसा प्रभावशाली प्रकार है, जिसके माध्याम से न केवल शरीर के अंगों बल्कि मन, मस्तिष्क और आत्मा में संतुलन बनाया जाता है| यही कारण है कि योग से शा‍रीरिक व्याधियों के अलावा मानसिक समस्याओं से भी निजात पाई जा सकती है|

योग शब्द की उत्पत्त‍ि संस्कृति के युज से हुई है, जिसका मतलब होता है आत्मा का सार्वभौमिक चेतना से मिलन| योग लगभग दस हजार साल से भी अधिक समय से अपनाया जा रहा है| वैदिक संहिताओं के अनुसार तपस्वियों के बारे में प्राचीन काल से ही वेदों में इसका उल्लेख मिलता है| सिंधु घाटी सभ्यता में भी योग और समाधि को प्रदर्श‍ित करती मूर्तियां प्राप्त हुईं|

हिन्दू धर्म में साधु, संन्यासियों व योगियों द्वारा योग सभ्यता को शुरू से ही अपनाया गया था, परंतु आम लोगों में इस विधा का विस्तार हुए अभी ज्यादा समय नहीं बीता है| बावजुद इसके, योग की महिमा और महत्व को जानकर इसे स्वस्थ्य जीवनशैली हेतु बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है, जिसका प्रमुख कारण है व्यस्त, तनावपूर्ण और अस्वस्थ दिनचर्या में इसके सकारात्मक प्रभाव|

1) मंत्रयोग, जिसके अंतर्गत वाचिक, मानसिक, उपांशु आर अणपा आते हैं।
2) हठयोग
3) लययोग
4) राजयोग, जिसके अंतर्गत ज्ञानयोग और कर्मयोग आते हैं।

व्यापक रूप से पतंजलि औपचारिक योग दर्शन के संस्थापक माने जाते हैं। पतंजलि के योग, बुद्धि नियंत्रण के लिए एक प्रणाली है, जिसे राजयोग के रूप में जाना जाता है। पतंजलि के अनुसार योग के 8 सूत्र बताए गए हैं, जो निम्न प्रकार से हैं –

1) यम – इसके अंतर्गत सत्य बोलना, अहिंसा, लोभ न करना, विषयासक्ति न होना और स्वार्थी न होना शामिल है।
2) नियम – इसके अंतर्गत पवित्रता, संतुष्ट‍ि, तपस्या, अध्ययन, और ईश्वर को आत्मसमर्पण शामिल हैं|
3) आसन – इसमें बैठने का आसन महत्वपूर्ण है |
4) प्राणायाम – सांस को लेना, छोड़ना और स्थगित रखना इसमें अहम है|
5) प्रत्याहार – बाहरी वस्तुओं से, भावना अंगों से प्रत्याहार|
6) धारणा – इसमें एकाग्रता अर्थात एक ही लक्ष्य पर ध्यान लगाना महत्वपूर्ण है|
7) ध्यान – ध्यान की वस्तु की प्रकृति का गहन चिंतन इसमें शामिल है|
8) समाधि – इसमें ध्यान की वस्तु को चैतन्य के साथ विलय करना शामिल है| इसके दो प्रकार हैं- सविकल्प और अविकल्प| अविकल्प में संसार में वापस आने का कोई मार्ग नहीं होता| अत: यह योग पद्धति की चरम अवस्था है|
हमारे जीवन मे योगा की बहुत आवश्यकता हैं, इसीलिए आप भी योगा करे और स्वस्त रहे|

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