चाँद की आत्मकथा हिंदी निबंध Autobiography of Moon Essay in Hindi

Autobiography of Moon Essay in Hindi: मेरी आत्मकथा सुनने का उसे ही अधिकार है, जिसे सौदर्य पर जीने और मरने की तमन्ना हो। अगर आप सौदर्य का मूल्य जानते होंगे तो मेरी बातों में अवश्य ही दिलचस्पी लेंगे।

चाँद की आत्मकथा हिंदी निबंध - Autobiography of Moon Essay in Hindi

चाँद की आत्मकथा हिंदी निबंध – Autobiography of Moon Essay in Hindi

जन्म और बचपन

अपने जन्म के बारे में मैं विशेष नहीं जानता। मैंने इतना जरूर सुना है कि मेरा जन्म पृथ्वी से हुआ है। यह कितने दुख की बात है कि जन्म होते ही मैं जननी से अलग हो गया । अलग होकर मैं उसके चारों ओर घूमने लगा। धीरे-धीरे असंख्य तारों के साथ रहकर मैं उनमें रम गया और आकाश में खेलने लगा।

बच्चों का मामा और कवि-कलाकारों का प्यार

रूप को दौलत मुझे जन्म से ही मिली है। यह दौलत मुझे अपने नाना सूर्यदेव से मिली है। अपने इस रूप से मैंने सबका मन मोह लिया है। धरती के लोगों का तो मैं दुलारा बन गया हूँ। धरती पर रहनेवाली मेरी बहनें अपने शिशुओं को ‘मामा’ के रूप में मेरा परिचय देती हैं । रात को उँगली उठाकर जब वे गाते हैं, “चंदामामा आ जा, दूध-भात खा जा'” तो मैं धन्य हो जाता हूँ। मैं कवियों और कलाकारों को भी प्रिय हूँ।

विविध रूप

नित्य नए-नए रूप में आना मुझे अच्छा लगता है। कभी मैं छोटा हो जाता हूँ और कभी बड़ा। प्रतिपदा को भगवान शंकर मुझे अपने मस्तक पर धारण कर लेते हैं। इस प्रकार मैं शिवभक्तों के निकट रहता हूँ। पूनम के दिन मेरी सुंदरता का कहना ही क्या? उस दिन मैं अपनी प्रेयसी ज्योत्स्ना के साथ संसार की सैर करने निकलता हूँ। मैं तो धरती पर नहीं आ सकता, इसलिए अपनी चाँदनी को वहाँ भेज देता हूँ। अमावस के दिन मैं छुट्टी मनाता हूँ और पूरा विश्राम करता हूँ।

कलंक

संसार में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति मिलेगा, जिसने मुझे प्यार की नजरों से न देखा हो । मेरी मधुर मुसकान देखकर लोग मारे खुशी के फूले नहीं समाते । पशु-पक्षी भी मुझे देखकर प्रसन्न हो जाते हैं। समुद्र भी मुझसे मिलने के लिए हमेशा उत्सुक रहता है। मेरे रूप में कुछ लोग कलंक देखते हैं। अब मैं उन्हें किस प्रकार समझाऊँ कि जिसे वे मेरा कलंक कहते हैं, वह मेरे चेहरे का तिलक है। इससे तो मेरी सुंदरता और भी बढ़ गई है !

उपसंहार

धरती के लोगों ने मुझ तक पहुँचने में सफलता पाई है। एक दिन कुछ अमरीको अंतरिक्षयात्री मेरे सीने पर आकर उतरे थे। उस दिन मैं धरतीवासियों के चरण-स्पर्श से धन्य हो गया। अब मैं अपने इस सूनेपन से ऊबता जा रहा हूँ। मैं सच्चे दिल से चाहता हूँ कि धरती के लोग यहाँ भी एक नई दुनिया बसाएँ । क्या मेरी तमन्ना कभी पूरी हो सकेगी?

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