राशन की दुकान पर एक घंटा हिंदी निबंध Ration Shop Essay in Hindi

Ration Shop Essay in Hindi: भारत विशाल देश है। यहाँ के अधिकांश परिवार गरीब या निम्नमध्यम वर्ग के हैं। बाजार में वस्तुएं उचित मूल्य पर मिलती रहें तो लोगों को कोई शिकायत नहीं होती। लेकिन कभी-कभी व्यापारी आवश्यक वस्तुओं का अभाव पैदा करके उनका काला बाजार करने लगते हैं। इस समस्या को हल करने के लिए सरकार ने राशन-प्रणाली लागू की है।

राशन की दुकान पर एक घंटा पर हिंदी में निबंध Ration Shop Essay in Hindi

राशन की दुकान पर एक घंटा पर हिंदी में निबंध Ration Shop Essay in Hindi

राशन की कतार में

राशन के लिए सरकारमान्य दुकानें होती हैं। इनसे प्रति व्यक्ति के राशनकार्ड पर निश्चित मात्रा में अनाज, शक्कर, मिट्टी का तेल आदि चीजें सस्ते दामों पर मिलती हैं। पिछले सप्ताह अपने परिवार का राशन लाने के लिए मुझे जाना पड़ा। रुपए, राशनकार्ड, थैलियाँ और मिट्टी के तेल के लिए डिब्बा लेकर मैं सुबह दस बजे राशन की दुकान पर पहुँच गया। वहाँ एक लंबी कतार पहले से ही लगी हुई थी। मैं भी उसमें खड़ा हो गया । कतार में अधिकतर स्त्रियाँ थीं । कुछ के हाथ में छोटे बच्चे भी थे। कुछ नवयुवक और कुछ लड़कियाँ भी थीं। सबके हाथ में तरह-तरह को थैलियाँ थीं।

रोचक प्रसंग

धीरे-धीरे कतार आगे बढ़ने लगी। इतने में एक नवयुवक कतार के बीच में घुसने लगा। कतार में खड़े लोग जोर से चिल्लाए । वह बेचारा अपना-सा मुँह लेकर सबके पीछे जाकर खड़ा हो गया। कुछ देर बाद दुकान में कुछ गडबड़ी हुई। मालूम हुआ कि एक भाई की जेब कट गई थी !

उपेक्षापूर्ण व्यवहार

मैंने घड़ी की ओर देखा। पौना घंटा बीत चुका था। मेरी बारी आने में अभी देर थी। राशन देनेवाले कर्मचारियों की सुस्ती पर मुझे गुस्सा आ रहा था। बाहर लोग खड़े-खड़े परेशान हो रहे थे और वे लोग बड़े मजे से धीरे-धीरे अपना काम कर रहे थे। लेकिन मैं कर क्या सकता था? आखिर मेरी भी बारी आई । एक घंटे की तपश्चर्या का फल मिला । मैनें अपना राशनकार्ड बताया। शक्कर और चावल तो उपलब्ध थे, लेकिन मिट्टी का तेल खतम हो गया था। मुझे बड़ा अफसोस हुआ, क्योंकि घर में मिट्टी का तेल जरा भी नहीं था। खैर, मैने शक्कर और चावल का बिल बनवाया और पैसे चुकाए । बिल सामान तौलनेवाले आदमी को दे दिया। उसने बिल देखकर उसे किनारे से थोड़ा फाड़ दिया और दोनों चीजें तौल दी । अनाज लेकर मैं बाहर निकला तो धूप के मारे बुरा हाल था। घड़ी ठीक ग्यारह बजा रही थी। इस तरह पूरे एक घंटे के बाद मैं अधूरा राशन लेकर घर लौटा।

अनुभव

राशन की दुकान पर बिताया हुआ वह एक घंटा कष्टप्रद होने के साथ साथ बड़ा लाभप्रद भी रहा । मुझे लोगों के विचार और व्यवहार जानने का अवसर मिला । देश, समाज, सरकार, राजनीति धर्म आदि के बारे में सहज चर्चा सुननी हो तो राशन की दुकान पर कतार में मजे से सुनी जा सकती है।


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